बाहर और परे : इर्शी फ्रीड द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – उपन्यास | Bahar Aur Pare : by Irshi Fried Hindi PDF Book – Novel (Upanyas)

बाहर और परे : इर्शी फ्रीड द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - उपन्यास | Bahar Aur Pare : by Irshi Fried Hindi PDF Book - Novel (Upanyas)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name बाहर और परे / Bahar Aur Pare
Author
Category, , , ,
Language
Pages 175
Quality Good
Size 5 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : आधी रात का वक्‍त था दो या, तीन बजे होंगे। हम एक बजे तक जागते रहे थे। मुझे याद है क्योंकि आखिरी सिगरेट जलाते समय मैंने घड़ी देखी थी। ट्रंक-कॉल आयी थी। टेलीफोन-एक्सचेंज ने मेरा नम्बर पूछा था। मुझे काफी झल्लाहट हुई थी कि मेरे जैसे जाने-माने आदमी का नाम उसके लिए टेलीफोन करने……….

Pustak Ka Vivaran : Aadhee Rat ka Vakt tha do ya, Teen Baje honge. Ham Ek Baje Tak Jagate rahe the. Mujhe Yad hai Kyonki Aakhiri Sigaret jalate samay mainne ghadi dekhi thee. Trank-kol Aayi thee. Teliphon-Eksachenj ne mera Nambar poochha tha. Mujhe kaphi jhallahat huyi thee ki mere Jaise Jane-Mane Aadami ka Nam usake liye Teleephon karane………….

Description about eBook : It was midnight or two or three o’clock. We were awake till one o’clock. I remember because the last cigarette I lit was when I saw the clock. The trunk call came. The telephone-exchange asked my number. I was very much worried that the name of a well-known man like me would telephone for him……….

“कोई गलती न करना मनुष्य के बूते की बात नहीं है, लेकिन अपनी त्रुटियों और गलतियों से समझदार व्यक्ति भविष्य के लिए बुद्धिमत्ता अवश्य सीख लेते हैं।” ‐ प्लूटार्क
“To make no mistakes is not in the power of man; but from their errors and mistakes the wise and good learn wisdom for the future.” ‐ Plutarch

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