कौन सयाना : गुणमणि दास द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – बच्चों की पुस्तक | Kaun Sayana : by Gunamani Das Hindi PDF Book – Children’s Book (Bachchon Ki Pustak)

Book Nameकौन सयाना / Kaun Sayana
Author
Category, , ,
Language
Pages 18
Quality Good
Size 8 MB
Download Status Available

कौन सयाना का संछिप्त विवरण : लोमड़ी उस लता के सहारे सुरक्षित बाहर आ गई। लेकिन यह क्या? बाहर आते ही उसने अपना रंग दिखा दिया। अब वह बकरी को पकड़ने के लिए दौड़ने लगी। बकरी को अपने बचने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। तभी उसके मन में एक विचार आया। “मैं तो बूढ़ी हो गई हूँ। मेरे सूखे माँस में तुम्हें कहाँ स्वाद आयेगा?” “तो फिर मेरे लिए कहीं से दूँढ कर खरगोश ले आओ!’ लोमड़ी ने उत्तर दिया……..

Kaun Sayana PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Lomari us lata ke sahare surakshit bahar aa gaeyi. Lekin yah kya? Bahar aate hee usane apana rang dikha diya. Ab vah bakari ko pakadane ke liye daudane lagi. bakari ko apane bachane ka koi rasta nahin dikh raha tha. tabhee usake man mein ek vichaar aaya. “main to boodhee ho gaee hoon. mere sookhe maans mein tumhen kahan svad Aayega?” To phir mere liye kaheen se doondh kar kharagosh le aao! Lomri ne uttar diya…………
Short Description of Kaun Sayana PDF Book : The fox came out safely with the help of that creeper. But what’s this? He showed his color as soon as he came out. Now she started running to catch the goat. The goat did not see any way to escape. Then a thought came to his mind. “I am old. Where will you taste in my dry meat? ” “Then find a rabbit for me somewhere.” The fox replied …………
“मृत्यु के डर के निवारण का शायद सर्वोत्तम उपाय इस बात पर विचार करने में है कि जीवन की एक शुरुआत होती है और एक अंत होता है। एक समय था जब आप नहीं थे: उससे हमे कोई मतलब नहीं होता। तो फिर हमें क्यों तकलीफ होती है कि ऐसा समय आएगा जब हम नहीं होंगे? मृत्यु के बाद सब कुछ वैसा ही होता है जैसा हमारे जन्म से पहले था।” – विलियम हज़्लिट्ट
“Perhaps the best cure for the fear of death is to reflect that life has a beginning as well as an end. There was a time when you were not: that gives us no concern. Why then should it trouble us that a time will come when we shall cease to be? To die is only to be as we were before we were born.” – William Hazlitt

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