प्रेमचंद का कथा साहित्य और उन पर लिखी आलोचनाएँ : कु० अनुसुइया श्रीवास्तव द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – साहित्य | Premchand Ka Katha Sahitya Aur Un Par Likhi Alochanayen : by Ku. Anusuiya Shrivastav Hindi PDF Book – Literature (Sahitya)

प्रेमचंद का कथा साहित्य और उन पर लिखी आलोचनाएँ : कु० अनुसुइया श्रीवास्तव द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - साहित्य | Premchand Ka Katha Sahitya Aur Un Par Likhi Alochanayen : by Ku. Anusuiya Shrivastav Hindi PDF Book - Literature (Sahitya)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name प्रेमचंद का कथा साहित्य और उन पर लिखी आलोचनाएँ / Premchand Ka Katha Sahitya Aur Un Par Likhi Alochanayen
Author
Category, ,
Language
Pages 337
Quality Good
Size 34 MB
Download Status Available

प्रेमचंद का कथा साहित्य और उन पर लिखी आलोचनाएँ का संछिप्त विवरण : प्रेमचंद आलोचक और रचनाकार दोनो के लिए चुनौती रहे है। आलोचक की आलोचना की सर्जनात्मकता की परीक्षा-स्थली प्रेमचंद का साहित्य है। आलोचक की मुठभेड प्रेमचंद साहित्य से किस रूप मे होती है या आलोचक किस रूप मे प्रेमचंद साहित्य से टकराता है- इससे उसकी आलोचना की स्तरीयता का उद्घाटन होता है……….

Premchand Ka Katha Sahitya Aur Un Par Likhi Alochanayen PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Premachand Aalochak aur Rachanakar dono ke liye Chunauti rahe hai. Aalochak ki Alochana ki Sarjanatmakata ki pariksha-sthali Premchand ka sahity hai. Aalochak ki Muthabhed Premchand sahity se kis roop me hoti hai ya Aalochak kis roop me Premchand sahity se takrata hai- isase uski Aalochana ki Stariyata ka udghatan hota hai………..
Short Description of Premchand Ka Katha Sahitya Aur Un Par Likhi Alochanayen PDF Book : Premchand has been a challenge to both the critic and the writer. Premchand’s literature is the test site of the creativity of critic’s criticism. In what form does the critic’s encounter with Premchand literature or in what form the critic collides with Premchand literature – this opens the level of his criticism………
“उद्यमी अनिवार्य रूप से कल्पनाशील और कार्यान्वित करने वाला होता है। वह कुछ कल्पना कर सकता है, तो जब वह कल्पना करता है तो यह भी साफ देख पाता है कि उसका कार्यान्वयन कैसे हो सकता है।” रॉबर्ट एल श्वार्ज़
“The entrepreneur is essentially a visualizer and an actualizer. He can visualize something, and when he visualizes it he sees exactly how to make it happen.” Robert L. Schwartz

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