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राष्ट्र सेवा दल इतिहास और कार्य / Rashtra Seva Dal Itihas Aur Karya

राष्ट्र सेवा दल इतिहास और कार्य : डॉ. मु. ब. शहा द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - इतिहास | Rashtra Seva Dal Itihas Aur Karya : by Dr. M.B. Shaha Hindi PDF Book - History (Itihas)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name राष्ट्र सेवा दल इतिहास और कार्य / Rashtra Seva Dal Itihas Aur Karya
Author
Category, , ,
Language
Pages 105
Quality Good
Size 8 MB
Download Status Available

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

पुस्तक का विवरण : अंग्रेजों की निरंकुश सत्ता के खिलाफ असंतोष के स्वर उठ रहे थे। मंगल पांडे से लेकर भगतसिंह, राजगुरु, आजाद तक के युवकों की एक पीढी थी जो अपनी जान की पर्वाह किए बगैर स्वतंत्रता के आंदोलन में कूद पडी थी। स्कूल-कॉलेज की पढाई छोडकर किशोर, युवक, युवतियां एक ऐसे अहिंसक आंदोलन को चला रहे थे जो इसके पहले देश में उपलब्ध नहीं था। इसी आंदोलन की दो धाराएं बनीं……..

Pustak Ka Vivaran : Angrejon kee Nirankush satta ke khilaph Asantosh ke svar uth rahe the. Mangal Pande se lekar bhagatasinh, Rajguru, Aazad tak ke Yuvakon kee ek peedhee thee jo apanee jan kee parvah kiye bagair svatantrata ke Aandolan mein kood padi thee. School-College kee padhai chhodakar kishor, yuvak, yuvatiyan ek aise ahinsak Aandolan ko chala rahe the jo isake pahale desh mein upalabdh nahin tha. Isi Andolan kee do dharayen baneen………….

Description about eBook : Although English and many other languages of Europe have a long-standing strong tradition of detective novels of various kinds, in Hindi and Urdu, this variety of novels did not find its place. Even today, if we take popular entertainment-oriented novels topped, then ‘Chalu’ or as they are commonly called……………….

“जंगली जानवर कभी मन बहलाव के लिए शिकार नहीं करते। मनुष्य ही एक अकेला जीव है जिसके लिए साथी जीव-जंतुओं की यातना और शिकार अपने आप में आनंददायक है।” ‐ जेम्स एंथनी फ्रौड
“Wild animals never kill for sport. Man is the only one to whom the torture and death of his fellow creatures is amusing in itself.” ‐ James Anthony Froude

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