श्री प्रेम रामायण / Shri Prem Ramayan

श्री प्रेम रामायण पुस्तक का कुछ अंश : श्री सीताराम रसिक प्रेमियों के पोषण के लिये बहुत से रसवर्धक ग्रंथ संत समाज में उपलब्ध हैं फिर भी मैथिल सख्य रस का साहित्य न के बराबर ही है। यद्यपि इस रस के रसिक संत सदा से कुछ होते ही आये हैं । जैसे :- मामा प्रयागदास जी इत्यादि । तथापि रस मत्त उन रसिकों द्वारा कुछ न लिखा जाना स्वाभाविक था | जब तक मुख जल के ऊपर है, तभी तक बोलना आता है, जब अथाह जल में डूब गया तब वाणी का विकास नहीं बनता । अस्तु। मैथिल सखाओं का प्रेम श्री सीताराम जी से भगिनी भाम सम्बन्ध से संबंधित होकर किस स्थिति को प्राप्त हुआ, युगल मनोहर मधुमई मूर्तियों की परिचर्या उन्होंने किस विधि से की, श्री सोताराम जी की कृपा एवं प्रीति मैथिल सखाओं पर कहाँ तक कैसी रही; इत्यादि विषयों की जानकारी साहित्य द्वारा………
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | श्री प्रेम रामायण / Shri Prem Ramayan |
| Author | Shri Ramharshan Das ji |
| Category | Religious Books in Hindi PDF Ramayan Book in Hindi Spiritual PDF Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 773 |
| Quality | Good |
| Size | 115 MB |
| Download Status | Available |
“हमें परिमित निराशा को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन अपरिमित आशा को कभी नहीं खोना चाहिए।” मार्टिन लूथर किंग, जूनियर (१९२९-१९६८), अश्वेत मानवाधिकारी नेता
“We must accept finite disappointment, but never lose infinite hope.” Martin Luther King, Jr. (1929-196), Black civil-rights leader
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