भाई दूज कथा (कथा और पूजा विधि) : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – धार्मिक | Bhai Dooj Katha (Katha Aur Puja Vidhi) : Hindi PDF Book – Religious (Dharmik)

Book Nameभाई दूज कथा (कथा और पूजा विधि) / Bhai Dooj Katha (Katha Aur Puja Vidhi)
Category, , ,
Language
Pages 6
Quality Good
Size 917 KB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : भगवान सूर्य नारायण की पंत्री का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया……..

Pustak Ka Vivaran : Bhagvan Soory Narayan ki Panti ka Naam Chhaya tha. Unki kokh se Yamraj tatha Yamuna ka janm huya tha. Yamuna Yamraj se bada sneh karti thi. Vah usase barabar Nivedan karti ki isht Mitron Sahit uske Ghar Aakar bhojan karo. Apne kary mein vyast Yamraj bat ko Talata raha. Kartik shukla ka din aaya. Yamuna ne us din phir Yamraj ko bhojan ke liye Nimantran dekar, use apne ghar aane ke liye Vachanabaddh kar liya………

Description about eBook : The name of the pantri of Lord Surya Narayan was Chhaya. Yamraj and Yamuna were born from his womb. Yamuna used to love Yamraj very much. She would request him to come to his house and have food with his favorite friends. Yamraj, who was busy with his work, kept postponing the matter. The day of Kartik Shukla has come. Yamuna again invited Yamraj for food that day, and promised him to come to his house………

“प्रकृति को गहराई से देखें, और आप हर चीज़ को बेहतर समझ पाएंगे।” ‐ अल्बर्ट आइंस्टीन
“Look deep into nature, and then you will understand everything better.” ‐ Albert Einstein

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भाई दूज का महत्व :-

                                       दिवाली (Diwali) और गोवर्धन (Govardhan Puja) के पर्व की तरह ही भाई दूज (Bhai Dooj 2021) के त्योहार का भी बहुत महत्व है. यह त्योहार दिवाली के दो दिन बाद यानि गोवर्धन पर्व के अगले दिन मनाया जाता है, जिसमें बहनें अपने भाईयों को टीका कर कलावा बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं.

ये तो सभी जानते हैं कि भाई दूज पर्व भाईयों के प्रति बहनों की श्रद्धा और विश्वास का पर्व है. इस पर्व को हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन ही मनाया जाता है. इस पर्व को बहनें अपने भाईयों के माथे पर तिलक लगा कर मनाती हैं और भगवान से अपने भाइयों की लम्बी आयु की कामना करती हैं. हिन्दू धर्म में भाई-बहन के स्नेह-प्रतीक के रूप में दो त्योहार मनाये जाते हैं. पहला रक्षाबंधन जो कि श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, इसमें भाई बहन की रक्षा करने की प्रतिज्ञा करता है |

भैयादूज के शुभ मुहूर्त

भाई के तिलक के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 8 बजकर 10 मिनट से 9.33 बजे तक शुभ चौघड़िया. दोपहर 12. 19 बजे से शाम 4.27 बजे तक चर, लाभ और अमृत के चौघड़िया रहेंगे. 

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