जनमानस : डॉ. रवीन्द्र कुमार जैन द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – काव्य | Jan Manas : by Dr. Ravindra Kumar Jain Hindi PDF Book – Poetry (Kavya)

जनमानस : डॉ. रवीन्द्र कुमार जैन द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - काव्य | Jan Manas : by Dr. Ravindra Kumar Jain Hindi PDF Book - Poetry (Kavya)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name जनमानस / Jan Manas
Author
Category, , , , , ,
Language
Pages 86
Quality Good
Size 2 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : यह भी स्वीकृत सत्य है कि मानव की समग्र सहजता का चित्रण काव्य में होता है। अत काव्य को केवल नैतक मूल्यों में बांध देने पर हम उसकी विराटता को पग नहीं बना देंगे ? मानव सहज वातावरण में रहकर स्वप्न अपनी ऊर्जा का अन्वेषण करता है और ऊपर उठता है। काव्य तो इस प्रक्रिया……..

Pustak Ka Vivaran : Yah bhee sveekrt saty hai ki manav kee samagr sahajata ka chitran kavy mein hota hai. At kavy ko keval naitak moolyon mein bandh dene par ham usakee viratata ko pag nahin bana denge ? Manav sahaj vatavaran mein rahakar svapn apanee oorja ka anveshan karata hai aur oopar uthata hai. Kavy to is prakriya…………

Description about eBook : It is also an accepted truth that the overall essence of human depiction is in poetry. Therefore, if we bind only poetry into moral values, will we not make the legacy of its legacy? By staying in the human spontaneous environment, the dream explores its energy and wakes up. Poetry then this process………..

“विश्व की सबसे सुन्दरतम वस्तुओं को देखा या छुआ भी नहीं जा सकता है, उन्हें केवल दिल से महसूस किया जा सकता है।” ‐ हेलन केलर
“The most beautiful things in the world cannot be seen or even touched, they must be felt with the heart.” ‐ Helen Keller

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