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एतरेयोपनिषद / Aitareya Upanishad

etreyopanishad एतरेयोपनिषद : शंकराचार्य द्वारा मुफ्त हिंदी उपनिषद पीडीएफ पुस्तक | Aitareya Upanishad : by Shankaracharya Free Hindi Upanishads PDF Book
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name एतरेयोपनिषद / Aitareya Upanishad
Author
Category,
Language
Pages 106
Quality Good
Size 4.5 MB
Download Status Available

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

एतरेयोपनिषद पुस्तक का कुछ अंश : ऋग्वेद ऐत्रेयारान्याकान्तार्गत द्वितीय आरण्यक के अध्याय ४, ५ और ६ का नाम ऐतरेयोपनिषद है | यह उपनिषद् ब्रह्मविद्या प्रधान है | भगवान शंकराचार्य ने इसके ऊपर जो भाष्य लिखा है वह बहुत ही महत्वपूर्ण है | इसके उपोद्घात-भाष्य में उन्होंने मोक्ष के हेतु का निर्णय करते हुए कर्म और कर्मसमुच्चित ज्ञान का निराकरण कर केवल ज्ञान को ही उसका एकमात्र साधन बतलाया है | फिर ज्ञान के अधिकारी का निर्णय किया है और बड़े समारोह के साथ कर्मकाण्डी के अधिकार…….

Aitareya Upanishad PDF Pustak in Hindi Ka Kuch Ansh : Rigved Aitreyaranyakantargat dviteey aaranyak ke adhyay 4, 5 aur 6 ka nam aitareyopanishad hai | yah upanishad brahmavidya pradhan hai | bhagavan shankarachary ne isake oopar jo bhashy likha hai vah bahut hee mahatvapurn hai | isake upodghat-bhashy mein unhonne moksh ke hetu ka nirnay karate hue karm aur karmasamuchchit gyaan ka nirakaran kar keval gyan ko hee usaka ekamatr sadhan batalaya hai | phir gyaan ke adhikaree ka nirnay kiya hai aur bade samaroh ke sath karmakandi ke adhikar…….
Short Passage of Aitareya Upanishad Hindi PDF Book : Chapters 4, 5 and 6 of Rigveda Aitreyaranyakantargat II Aranyak are named Aitreyopanishad. This Upanishad is Brahmavidya Pradhan. The commentary written by Lord Shankaracharya on this is very important. In its Upodghat-Bhasya, while deciding the cause of salvation, he has told only knowledge as its only means, eliminating the knowledge of karma and karma. Then the authority of knowledge has been decided and with great ceremony the authority of rituals…….
“हमें कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहिए जिसे हम अपने बच्चों को करते हुए देखने के इच्छुक नहीं है।” – ब्रिघम यंग
“We should never permit ourselves to do anything that we are not willing to see our children do.” -Brigham Young

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1 thought on “एतरेयोपनिषद / Aitareya Upanishad”

  1. श्रीमान जी मैं इस पुस्तक को डोनेलोड नहीं कर पा रहा हु | इसमे लिखा तो हैं के डोनेलोड लिंक नीचे दिया गया हैं लेकिन मुझे तो नीचे कोई लिंक नहीं दिख रहा हैं कृपया कुछ मदत करे |

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