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भाई के पत्र / Bhai Ke Patra

भाई के पत्र : श्री रामनाथलाल 'सुमन' द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - सामाजिक | Bhai Ke Patra : by Shri Ram Nath Lal Hindi PDF Book - Social (Samajik)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name भाई के पत्र / Bhai Ke Patra
Author
Category, , ,
Language
Pages 392
Quality Good
Size 41 MB
Download Status Available

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

भाई के पत्र पीडीऍफ़ पुस्तक का संछिप्त विवरण : दूसरी बात जो मैं इस सम्बन्ध में देखता हूँ, स्त्रियों के दुख को बढ़ाकर कहने और पुरुषों की कठिनाइयों का बिल्कुल ख्याल न करने की मनोवृत्ति है। जो लोग आज समाज में स्त्रियों की समस्या को लेकर आंदोलन कर रहे हे और उनके सच्चे हितेषी समझे जाते है, वे सारे अपराधों और दोषों का बोझ पुरुषों पर डालना चाहते है। दुःख की बात तो यह है कि स्वयं स्त्रियां भी ……….

Bhai Ke Patra PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Doosari bat jo main is sambandh mein dekhata hoon, striyon ke duhkh ko badhakar kahane aur purushon kee kathinaiyon ka bilkul khyal na karane kee manovrtti hai. Jo log aaj samaj mein striyon kee samasya ko lekar Aandolan kar rahe hai aur unake sachche hitaishee samajhe jate hai, ve sare aparadhon aur doshon ka bojh purushon par dalana chahate hai. duhkh kee bat to yah hai ki svayan striyan bhi…………

Short Description of Bhai Ke Patra Hindi PDF Book : The second thing that I see in this regard is the attitude of saying to increase the sorrow of women and not taking care of the difficulties of men at all. Those who are agitating about the problem of women in the society today and are considered to be their true benefactors, they want to put the burden of all crimes and defects on men. The sad thing is that the women themselves……………..

 

“सफल व्यक्ति होने का प्रयास न करें, अपितु गरिमामय व्यक्ति बनने का प्रयास करें।” ‐ अल्बर्ट आईंसटीन
“Try not to become a man of success, but rather try to become a man of value.” ‐ Albert Einstein

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