भारतवर्ष में जातिभेद : क्षितिमोहन सेन शास्त्री द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीएफ पुस्तक | Bharatvarsh Mein Jatibhed : by Kshitimohan Sen Shastri Free Hindi PDF Book

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“महिलाएं विवाह करती हैं इस आस में कि पुरुष बदल जाएंगे। पुरुष विवाह करते हैं इस आस में कि महिलाएं नहीं बदलेंगी। इसलिए दोनों निस्संदेह रूप से निराश ही होते हैं।” ‐ अल्बर्ट आइन्सटाइन
“Women marry men hoping they will change. Men marry women hoping they will not. So each is inevitably disappointed.” ‐ Albert Einstein

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भारतवर्ष में जातिभेद : क्षितिमोहन सेन शास्त्री द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीएफ पुस्तक | Bharatvarsh Mein Jatibhed : by Kshitimohan Sen Shastri Free Hindi PDF Book  

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पुस्तक का नाम / Name of Book : भारतवर्ष में जातिभेद / Bharatvarsh Mein Jatibhed

पुस्तक के लेखक / Author of Book : क्षितिमोहन सेन शास्त्री / Kshitimohan Sen Shastri

पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी / Hindi

पुस्तक का आकर / Size of Ebook : 8.7 MB

कुल पन्ने / Total pages in ebook : 272

पुस्तक डाउनलोड स्थिति / Ebook Downloading Status  : Best 

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पुस्तक का विवरण : प्रस्तुत पुस्तक आचार्य श्री क्षितिमोहन सेन महाशय की लिखी हुई प्रथम हिंदी पुस्तक है| यह उनके वृहत प्रयत्न ‘भारतवर्ष का सांस्कृतिक इतिहास’ का एक हिस्सा है| मेरे आग्रह पर उन्होंने इसे हिंदी में ही पहले प्रकाशित करना स्वीकार किया है| इसमें भारतवर्ष की सबसे बड़ी और अनन्य साधारण समस्या जाती भेद की शास्त्रीय और वैज्ञानिक दृष्टि से विवेचना की गई है ; इस विषय पर यह पहला प्रयत्न नहीं है, पर पाटक पढ़कर देखेंगे कि इस समस्या को आचार्य सेन ने बिल्कुल नए ढंग से देखा है| इसमें न तो वैज्ञानिक तटस्थता है, न मिशनरी प्रचार की उत्साह पूर्ण कलुष-दर्शिता और न समाज-सुधार की हाय-हाय की पुकार…………..

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Description about eBook : The present book is the first Hindi book written by Acharya Shri Kshitimohan Sen Mahasaya. This great effort is part of the ‘Cultural history of India’. At my insistence, they have accepted it to be published in Hindi first. In this, discrimination of the biggest and unique common problems of India has been considered in classical and scientific terms; This is not the first attempt on this subject, but Palkar will read and see that this problem has been noticed by Acharya Sen. in a completely new way. There is neither scientific neutrality nor enthusiasm for the missionary proclamation, full callousness and no hi-hai of society reform……………….

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One Quotation / एक उद्धरण
“आप जो कर सकते हैं करें, आप जहां हैं वहां, आपके पास जो है उससे।”
– टैडी रूज़वैल्ट


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“Do what you can, where you are, with what you have.” 
– Teddy Roosevelt

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