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भारतीय लोक साहित्य / Bhartiya Lok Sahitya

lok sahitya भारतीय लोक साहित्य : श्याम परमार द्वारा मुफ्त हिंदी साहित्य पीडीएफ पुस्तक | Bhartiya Lok Sahitya : by Shyam Parmar Free Hindi Literature PDF Book
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name भारतीय लोक साहित्य / Bhartiya Lok Sahitya
Author
Category,
Language
Pages 218
Quality Good
Size 17 MB
Download Status Available

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

भारतीय लोक साहित्य पुस्तक का कुछ अंश : आध्यात्मिक चिंतन अनिवार्य- जो लोग आध्यात्मिक चिंतन से विमुख होकर केवल लोकोपकारी कार्य में लगे रहते हैं, वे अपनी ही सफलता पर अथवा सद्गुणों पर मोहित हो जाते हैं | वे अपने आपको लोक सेवक के रूप में देखने लगते हैं | इस अवस्था में वे आशा करते हैं की सब लोग उनके कार्यों की प्रशंसा करें, उनका कहना मानें | उनका बढ़ा हुआ अभिमान उन्हें अनेक लोगो का शत्रु बन देता है | इससे उनकी लोकसेवा उन्हें वास्तविक लोक सेवक……….

Bhartiya Lok Sahitya PDF Pustak in Hindi Ka Kuch Ansh : Adhyatmik chintan anivary- jo log aadhyatmik chintan se vimukh hokar keval lokopakari kary mein lage rahate hain, ve apani hi saphalata par athava sadgunon par mohit ho jate hain | ve apane aapako lok sevak ke roop mein dekhane lagate hain | is avastha mein ve aasha karate hain kee sab log unake kaaryon kee prashansa karen, unaka kahana maanen | unaka badha hua abhimaan unhen anek logo ka shatru ban deta hai | isase unakee lokaseva unhen vastavik lok sevak……….
Short Passage of Bhartiya Lok Sahitya Hindi PDF Book : Spiritual thinking is essential- Those who are engaged only in philanthropic work by turning away from spiritual thinking, they get fascinated by their own success or virtues. They start seeing themselves as public servants. In this state, they expect that everyone should appreciate their actions, obey them. His increased pride makes him the enemy of many people. This makes his public service a real public servant…….
“जीवन में खुशी का अर्थ लड़ाइयां लड़ना नहीं, बल्कि उन से बचना है। कुशलतापूर्वक पीछे हटना भी अपने आप में एक जीत है।” नॉरमन विंसेंट पील (१८९८-१९९३)
“Part of the happiness of life consists not in fighting battles, but in avoiding them. A masterly retreat is in itself a victory.” Norman Vincent Peale (1898-1993)

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