पवमान सूक्तम् | Pavnam Suktam

पैप्पलाद शाखा जो अथर्ववेद की नौ शाखाओं में मुख्य है। पैप्पलाद संहिता में 21 मन्त्रों का एक सूक्त है जो पवनाम सूक्त कहलाता है। पवनाम शब्द का प्रमुख शाब्दिक अर्थ है शुद्ध करने वाला या शुद्ध होने वाला। अन्य ग्रंथों में भी इस पवनाम शब्द का अर्थ भिन्न है कहीं वायु, अग्नि तथा कहीं सोम वर्णित है। इस सूक्त के मन्त्रों का पाठ करने से आत्मा पवित्र होती है तथा मन शुद्ध होता है।

पवमान सूक्तम् | Pavnam Suktam

ओम् ॥ हिर॑ण्यवर्णाः॒ शुच॑यः पाव॒का
यासु॑ जा॒तः क॒श्यपो॒ यास्विंद्रः॑ ।
अ॒ग्निं-याँ गर्भ॑ओ दधि॒रे विरू॑पा॒स्ता
न॒ आप॒श्शग्ग् स्यो॒ना भ॑वंतु ॥

यासा॒ग्ं॒ राजा॒ वरु॑णो॒ याति॒ मध्ये॑
सत्यानृ॒ते अ॑व॒पश्यं॒ जना॑नाम् ।
म॒धु॒श्चुत॒श्शुच॑यो॒ याः पा॑व॒कास्ता
न॒ आप॒श्शग्ग् स्यो॒ना भ॑वंतु ॥

यासां᳚ दे॒वा दि॒वि कृ॒ण्वंति॑ भ॒क्षं
या अं॒तरि॑क्षे बहु॒धा भवं॑ति ।
याः पृ॑थि॒वीं पय॑सों॒दंति शु॒क्रास्ता
न॒ आप॒श्शग्ग् स्यो॒ना भ॑वंतु ॥

शि॒वेन॑ मा॒ चक्षु॑षा पश्यतापश्शि॒वया॑
त॒नुवोप॑ स्पृशत॒ त्वच॑ओ मे ।
सर्वाग्॑ओ अ॒ग्नीग्ं र॑प्सु॒षदो॑ हुवे वो॒ मयि॒
वर्चो॒ बल॒मोजो॒ निध॑त्त ॥

पव॑मान॒स्सुव॒र्जनः॑ । प॒वित्रे॑ण॒ विच॑र्​षणिः ।
यः पोता॒ स पु॑नातु मा । पु॒नंतु॑ मा देवज॒नाः ।
पु॒नंतु॒ मन॑वो धि॒या । पु॒नंतु॒ विश्व॑ आ॒यवः॑ ।
जात॑वेदः प॒वित्र॑वत् । प॒वित्रे॑ण पुनाहि मा ।
शु॒क्रेण॑ देव॒दीद्य॑त् । अग्ने॒ क्रत्वा॒ क्रतू॒ग्ं॒ रनु॑ ।
यत्ते॑ प॒वित्र॑म॒र्चिषि॑ । अग्ने॒ वित॑तमंत॒रा ।
ब्रह्म॒ तेन॑ पुनीमहे । उ॒भाभ्यां᳚ देवसवितः ।
प॒वित्रे॑ण स॒वेन॑ च । इ॒दं ब्रह्म॑ पुनीमहे ।
वै॒श्व॒दे॒वी पु॑न॒ती दे॒व्यागा᳚त् ।
यस्यै॑ ब॒ह्वीस्त॒नुवो॑ वी॒तपृ॑ष्ठाः ।
तया॒ मदं॑तः सध॒माद्ये॑षु ।
व॒यग्ग् स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ।
वै॒श्वा॒न॒रो र॒श्मिभि॑र्मा पुनातु ।
वातः॑ प्रा॒णेने॑षि॒रो म॑यो॒ भूः ।
द्यावा॑पृथि॒वी पय॑सा॒ पयो॑भिः ।
ऋ॒ताव॑री य॒ज्ञिये॑ मा पुनीताम् ॥

बृ॒हद्भिः॑ सवित॒स्तृभिः॑ । वर्‍षि॑ष्ठैर्देव॒मन्म॑भिः । अग्ने॒ दक्षैः᳚ पुनाहि मा । येन॑ दे॒वा अपु॑नत । येनापो॑ दि॒व्यंकशः॑ । तेन॑ दि॒व्येन॒ ब्रह्म॑णा । इ॒दं ब्रह्म॑ पुनीमहे । यः पा॑वमा॒नीर॒द्ध्येति॑ । ऋषि॑भि॒स्संभृ॑त॒ग्ं॒ रसम्᳚ । सर्व॒ग्ं॒ स पू॒तम॑श्नाति । स्व॒दि॒तं मा॑त॒रिश्व॑ना । पा॒व॒मा॒नीर्यो अ॒ध्येति॑ । ऋषि॑भि॒स्संभृ॑त॒ग्ं॒ रसम्᳚ । तस्मै॒ सर॑स्वती दुहे । क्षी॒रग्ं स॒र्पिर्मधू॑द॒कम् ॥

पा॒व॒मा॒नीस्स्व॒स्त्यय॑नीः । सु॒दुघा॒हि पय॑स्वतीः । ऋषि॑भि॒स्संभृ॑तो॒ रसः॑ । ब्रा॒ह्म॒णेष्व॒मृतग्॑ओ हि॒तम् । पा॒व॒मा॒नीर्दि॑शंतु नः । इ॒मं-लोँ॒कमथो॑ अ॒मुम् । कामा॒न्‍थ्सम॑र्धयंतु नः । दे॒वी‍र्दे॒वैः स॒माभृ॑ताः । पा॒व॒मा॒नीस्स्व॒स्त्यय॑नीः । सु॒दुघा॒हि घृ॑त॒श्चुतः॑ । ऋषि॑भिः॒ संभृ॑तो॒ रसः॑ । ब्रा॒ह्म॒णेष्व॒मृतग्॑ओ हि॒तम् । येन॑ दे॒वाः प॒वित्रे॑ण । आ॒त्मान॑ओ पु॒नते॒ सदा᳚ । तेन॑ स॒हस्र॑धारेण । पा॒व॒मा॒न्यः पु॑नंतु मा । प्रा॒जा॒प॒त्यं प॒वित्रम्᳚ । श॒तोद्या॑मग्ं हिर॒ण्मयम्᳚ । तेन॑ ब्रह्म॒ विदो॑ व॒यम् । पू॒तं ब्रह्म॑ पुनीमहे । इंद्र॑स्सुनी॒ती स॒हमा॑ पुनातु । सोम॑स्स्व॒स्त्या व॑रुणस्स॒मीच्या᳚ । य॒मो राजा᳚ प्रमृ॒णाभिः॑ पुनातु मा । जा॒तवे॑दा मो॒र्जयं॑त्या पुनातु । भूर्भुव॒स्सुवः॑ ॥

ॐ तच्छं॒-योँरावृ॑णीमहे । गा॒तुं-यँ॒ज्ञाय॑ । गा॒तुं-यँ॒ज्ञप॑तये ।
दैवी᳚स्स्व॒स्तिर॑स्तु नः । स्व॒स्तिर्मानु॑षेभ्यः । ऊ॒र्ध्वं जि॑गातु भेष॒जम् । शन्नो॑ अस्तु द्वि॒पदे᳚ । शं चतु॑ष्पदे ॥
ॐ शांतिः॒ शांतिः॒ शांतिः॑ ॥

सुने पवमान सूक्तम् | Listen Pavnam Suktam

Pavnam Suktam || by The Ghanapati

पवमान सूक्तम् पाठ के लाभ | Benefits of Pavnam Suktam

पवमान सूक्तम् के पाठ से अनेक लाभ होते हैं। इसके निम्न लाभ हैं:

  1. आत्मा का शुद्धीकरण : पवनाम सूक्त मन तथा आत्मा को शुद्ध करने वाला है, इस लिए नित्य प्रतिदिन इसका पाठ करें।
  2. शरीर और मन को शुद्ध करना: पवनाम सूक्त का पाठ करने से मानसिक चंचलता, तनाव और चिंताओं से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा, यह श्लोक संग्रह व्यक्ति के शरीर को भी शुद्ध करता है और उसे रोगों से बचाता है।
  3. नकारात्मक विचारों से बचाव : पवनाम सूक्त आध्यात्मिक तेज प्रदान करता है जिससे आपके मन में नकारात्मक विचारों के प्रभाव को रोकता है।
  4. संयम बढ़ाना: पवनाम सूक्त का पाठ करने से व्यक्ति का संयम बढ़ता है|
  5. पापनाशक मन्त्र संग्रह : ऐसा माना जाता है कि पवनाम सूक्त का जाप करने से पिछले पापों का नाश हो जाता है तथा साधक पुण्य कर्मों की ओर अग्रसर होता है।
  6. आध्यात्मिक उत्साह : इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के मन में आध्यात्मिक उत्साह की भावना उत्पन्न होती है और वह जीवन में अपने आध्यात्मिक उन्नयन के लिए सक्रिय होता है।

Leave a Comment