बोधिपथप्रदीपम : रिगजिन लुनडुब लामा द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक | Bodhipathpradipam : by Rigjin Lundub Lama Hindi PDF Book

बोधिपथप्रदीपम : रिगजिन लुनडुब लामा द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक | Bodhipathpradipam : by Rigjin Lundub Lama Hindi PDF Book
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name बोधिपथप्रदीपम / Bodhipathpradipam
Author
Category,
Pages 148
Quality Good
Size 6.4 MB
Download Status Available

बोधिपथप्रदीपम का संछिप्त विवरण : अतिशा का दूसरा नाम है श्री दीपंकर जान | तिब्बती भाषा में अतिशा को फुल-व्युड और श्री दीपंकर ज्ञान को इपल-मर-मे-मुजद कहते हैं। बैसे तो तिब्बती में ये कई नाम से पुकारे जाते हैं, जैसे, जो-वो जें, दूपल-जूदन अतिशा आदि | इनका जन्म बंगाल में 1680 ई. में राजकुमार के रूप में हुआ……..

 

Bodhipathpradipam PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Atisha ka doosara nam hai shri dipankar gyan. Tibbati bhasha mein atisha ko phul-vyun aur shri dipankar gyan ko drpal-mar-me-mujad kahate hain. Vaise to tibbati mein ye kai nam se pukare jate hain, jaise, jo-vo jen, doopal-joodan atisha adi. Inaka janm bangal mein 1680 ee. mein rajakumar ke roop mein hua.…………
Short Description of Bodhipathpradipam PDF Book : The second name of superstition is Shri Deepankar’s knowledge. In Tibetan language, full-blossom is called Full-Vogue and Sri Dipankar Knowledge is called ‘Dipal-dar-me-mujad’. Well, in Tibet, they are called by many names, such as those who, Dupal- He was born in 1680 AD in Bengal as a prince………….
“एक मूल नियम है कि समान विचारधारा के व्यक्ति एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं। नकारात्मक सोच सुनिश्चित रुप से नकारात्मक परिणामो को आकर्षित करती है। इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति आशा और विश्वास के साथ सोचने को आदत ही बना लेता है तो उसकी सकारात्मक सोच से सृजनात्मक शक्तियों सक्रिय हो जाती हैं- और सफलता उससे दूर जाने की बजाय उसी ओर चलने लगती है” ‐ नार्मन विंसेन्ट पीएले
“There is a basic law that like attracts like. Negative thinking definitely attracts negative results. Conversely, if a person habitually thinks optimistically and hopefully, his positive thinking sets in motion creative forces — and success instead of eluding him flows toward him.” ‐ Norman Vincent Peale

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