ज्ञान योग खंड 2 (विवेकानंद ग्रंथावली) : स्वामी विवेकानन्द द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक – ग्रन्थ | Gyan Yoga Part 2 (Vivekanand Granthawali) : by Swami Vivekanand Hindi PDF Book – Granth

ज्ञान योग खंड 2 (विवेकानंद ग्रंथावली) : स्वामी विवेकानन्द द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक – ग्रन्थ | Gyan Yoga Part 2 (Vivekanand Granthawali) : by Swami Vivekanand Hindi PDF Book – Granth
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name ज्ञान योग खंड 2 (विवेकानंद ग्रंथावली) / Gyan Yoga Part 2 (Vivekanand Granthawali)
Author
Category, , , ,
Language
Pages 328
Quality Good
Size 128 MB

पुस्तक का विवरण : मुझसे लोगों ने बेदांत दर्शन के कर्मकांड के संबंध में कुछ कहने के लिये कहा है। मैं कह चुका हूँ कि सिद्धांत तो बहुत ही अच्छा है, पर बह व्यवहार में कैसे लाया जाय ? यदि व्यवहार में नहीं लाया जा सकता, तो कोई सिद्धांत क्‍यों न हो, दो कौड़ी का है, वह केवल मनोविनोदार्थ है……….

Pustak Ka Vivaran : Mujhase logon ne vedaant darshan ke karmakand ke sambandh mein kuchh kahane ke liye kaha hai. Main kah chuka hoon ki siddhant to bahut hi achchha hai, par vah vyavahar mein kaise laya jay ? yadi vyavahar mein nahin laya ja sakata, to koi siddhant kyon na ho, do kaudi ka hai, vah keval manovinodarth hai…………

Description about eBook : I have asked people to say something about the rituals of Vedanta philosophy. I have said that the principle is very good, but how can it be brought into practice? If it can not be brought into practice, then there is no principle, two crores, it is only psychic……………….

“उन लोगों से दूर रहें जो आप आपकी महत्त्वकांक्षाओं को तुच्छ बनाने का प्रयास करते हैं। छोटे लोग हमेशा ऐसा करते हैं, लेकिन महान लोग आपको इस बात की अनुभूति करवाते हैं कि आप भी वास्तव में महान बन सकते हैं।” ‐ मार्क ट्वेन
“Keep away from people who try to belittle your ambitions. Small people always do that, but the really great make you feel that you, too, can become great.” ‐ Mark Twain

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