हिन्दी के सपूत / Hindi Ke Sapoot
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हिन्दी के सपूत पुस्तक का कुछ अंश : भारत एक है और अखंड है। अखंड भारत को आत्मा समान हर से हिंदू और मुसलमान इन दो जातियों में अनुस्यूत हे। आत्मा की वाणी के रूप में सचिर प्रकाशन ही साहित्य है। फलतः भारत के राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य के निर्माण में हिन्दू और मुसलमान दोनों जातियों का समान माग है । प्रस्तुत समूह में हिन्दी के हिन्दू और मुसलमान दोनों ही सपूतों की सचिर रचनाओं का संकलन है। कवित्व क्या है, १ और कवित्व की गिनती कौन-सी और कैसी विधाएँ………..
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | हिन्दी के सपूत / Hindi Ke Sapoot |
| Author | Suryakant |
| Category | Hindi Poetry Books PDF Kavya Book in Hindi PDF Literature Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 358 |
| Quality | Good |
| Size | 14.5 MB |
| Download Status | Available |
“व्यवहारकुशलता उस कला का नाम है जिसमें आप मेहमानों को घर जैसा आराम दें और मन ही मन मनाते भी जाएं कि वे अपनी तशरीफ उठा ले जाएं।” जॉर्ज ई बर्गमैन
“Tact is the art of making guests feel at home when that’s really where you wish they were.” George E Bergman
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