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जैनस्त्रीशिक्षा भाग – २ / Jain Strishiksha Part – 2

जैनस्त्रीशिक्षा भाग - २ : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - धार्मिक | Jain Strishiksha Part - 2 : Hindi PDF Book - Religious (Dharmik)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name जैनस्त्रीशिक्षा भाग – २ / Jain Strishiksha Part – 2
Category,
Language
Pages 50
Quality Good
Size 655 KB
Download Status Available

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

पुस्तक का विवरण : जैनमत में जीव अजीव आस्त्रव यंध संवर निर्जरा मोक्ष पूण्य और पाप ये नौ पदार्थ माने है | निरईरने के झर्ईररवसे हृदय पुलकित होता है | अजीर्णता पर भोजन करना विष के तुल्य है | आर्तध्यान ही दुःख का मूल कारन है | अपना प्रयोजन साधे बिना पर का उपकार करना ही यथार्थ उपकार है | निर्दय लोग सदा दुखी ही रहते है………

Pustak Ka Vivaran : Jainmat mein jeev ajiv aastrav yandh sanvar nirjara moksh puny aur paap ye naun padarth mane hai. Nirjharne ke jharjhararavase hraday pulkit hota hai. Ajirnata par bhojan karna vish ke tuly hai. Aartadhyan hee duhkh ka mool karan hai. Apna prayojan sadhe bina par ka upakar karna hee yatharth upakar hai. Nirday log sada dukhi hi rahte hai………..
Description about eBook : In Jainam, Jeevan Aviv Astrakh, Jang Samar, Nirjara Mukti is complete and sin is considered as the nine substances. The heart is flooded with the dizziness of dying. Eating on the catharsis is like poison. Attention is the root cause of sorrow. It is the only good thing to do your purpose without giving it on. The cruel people are always sad……………..
“वह एकमात्र स्थान जहां सफलता (सक्सेस) कार्य (वर्क) से पहले आती है, वह शब्दकोश है।” ‐ विडाल सास्सून
“The only place where success comes before work is in the dictionary.” ‐ Vidal Sassoon

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