जपसूत्रम भाग -३ : स्वामी प्रत्यगात्मानन्द सरस्वती द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – ग्रन्थ | Japa Sutram Part -3 : by Swami Pratyagatmanand Sraswati Hindi PDF Book – Granth

जपसूत्रम भाग -३ : स्वामी प्रत्यगात्मानन्द सरस्वती द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - ग्रन्थ | Japa Sutram Part -3 : by Swami Pratyagatmanand Sraswati Hindi PDF Book - Granth
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name जपसूत्रम भाग -३ / Japa Sutram Part -3
Author
Category,
Pages 332
Quality Good
Size 118 MB
Download Status Available

जपसूत्रम भाग -३ का संछिप्त विवरण : जमसुत्रम, तृतीय खण्ड का भाषानुवाद प्रस्तुत ज्क्कारते हुए इस खण्ड में स्वामीजी ने तरच्क समाचरण, आप्यायन रहस्य, न्यासभुतशुद्धि रहस्य संकेत, द्विदल बंदना प्रभृति के साथ-साथ अनुसंधिस्तु जप साधकों के हितार्थ विनियोग, महामाया, माया सृष्टिमूल शुद्धिसाम्यादी, शुद्धि प्रकृति प्रत्ययादि, विकृति ग्रन्थि…..

Japa Sutram Part -3 PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Jagsutram, trtiy khand ka bhashanuvad prastut jkkarate hue is khand mein svamiji ne tarachk samacharan, aapyayan rahasy, nyasabhutashuddhi rahasy sanket, dvidal bandana prabhrti ke sath-sath anutsandhistu jap sadhakon ke hitarth viniyog, mahamaya, maya srashtimul shuddhisamyadi, shuddhi prakrti pratyayadi, vikrti granthi…………
Short Description of Japa Sutram Part -3 PDF Book : In this section Swamiji has given a meaningful explanation in the section, Jogusutram, the translation of the third section, in which Swamiji has applied for the benefit of the devotees, Mahamaya, Maya Samarthimool Shuddhi Sahayam, Purification Nature, Pratyadi, Vikita Granthi…………..
“हर सुबह जब मैं अपनी आंखे खोलता हूं तो अपने आप से कहता हूं कि आज मुझमें स्वयं को खुश या उदास रखने का सामर्थ्य है न कि घटनाओं में। मैं इस बात को चुन सकता हूं कि यह क्या होगी। कल तो जा चुका है, कल अभी आया नहीं है। मेरे पास केवल एक दिन है, आज तथा मैं दिन भर प्रसन्न रहूंगा।” ग्रोचो मार्क्स
“Each morning when I open my eyes I say to myself: I, not events, have the power to make me happy or unhappy today. I can choose which it shall be. Yesterday is dead, tomorrow hasn’t arrived yet. I have just one day, today, and I’m going to be happy in it.” Groucho Marx

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