कला की ओर : प्रोफ़ेसर एम० के० वर्मा द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – साहित्य | Kala Ki Or : by Profesar M. K. Verma Hindi PDF Book – Literature ( Sahitya )

कला की ओर : प्रोफ़ेसर एम० के० वर्मा द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - साहित्य | Kala Ki Or : by Profesar M. K. Verma Hindi PDF Book - Literature ( Sahitya )
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name कला की ओर / Kala Ki Or
Author
Category,
Language
Pages 215
Quality Good
Size 12.3 MB
Download Status Available

कला की ओर पुस्तक का कुछ अंश : हमने संसार में जन्म लिया है, किसी प्रकार के मानसिक विचार के लिए हमें प्राप्त न थे रूप-गंध-स्पर्श आदि के द्रष्टिगत विचार उस समय हममें नहीं थे | केवल शरीर और मस्तिष्क सम्बन्धी आंगिक अवस्थाएँ ही वस्तु-बोध का कारण होती है | ये अवस्थाएं ही वातावरण के द्वारा हमें वर्हजागत से परिचित कराने लगी | वासना रूप से हमनें भिन्न-भिन्न वस्तुओं के छायाचित्र अंकित होने लगे और उसी के अनुसार हमें अनुभव करने लगे…….

Kala Ki Or PDF Pustak in Hindi Ka Kuch Ansh : Hamne sansar mein janm liya hai, kisi prakar ke manasik vichar ke lie hamen prapt na the rup-gandh-sparsh aadi ke drashtigat vichar us samay hamamen nahin the. Keval sharir aur mastishk sambandhi aangik avasthaen hi vastu-bodh ka karan hoti hai. Ye avasthaen hi vatavaran ke dwara hamen varhmajagat se parichit karane lagi. Vasana rup se hamanen bhinn-bhinn vastuon ke chayachitr ankit hone lage aur usi ke anusar hamen anubhav karne lage…………
Short Passage of Kala Ki Or Hindi PDF Book : We have born in the world, we were not received for any kind of mental thought; the thoughts of the form-smell-touch etc. were not in us at that time. Only body and mind-related sexual situations are the cause of idiom. These states started acquiring us through the atmosphere. Lustily, we started recording photographs of different objects and accordingly we started experiencing…………..
“मैं अपने जीवन को एक पेशा नहीं मानता। मैं कर्म में विश्वास रखता हूं। मैं परिस्थितियों से शिक्षा लेता हूं। यह पेशा या नौकरी नहीं है – यह तो जीवन का सार है।” ‐ स्टीव जॉब्स, संस्थापक, एप्पल
“I don’t think of my life as a career. I do stuff. I respond to stuff. That’s not a career — it’s a life!” ‐ Steve Jobs, Founder, Apple

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