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परीक्षामुख / Parikshamukh

परीक्षामुख : आचार्य माणिक्यनंदी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - ग्रन्थ | Parikshamukh : by Acharya Manikyanandi Hindi PDF Book - Granth
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name परीक्षामुख / Parikshamukh
Author
Category, , ,
Language
Pages 135
Quality Good
Size 400 MB
Download Status Available

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

परीक्षामुख का संछिप्त विवरण : इस मार्ग पर आने के बाद ब्रह्मचारी अवस्था से ही हम आचार्य स्वामी समन्तभद्र विरचित “देवगम स्तोत्र’ का पाठ करते थे। कहीं अर्थ समझ आता था, कहीं अर्थ समझ नहीं आता था, फिर भी ग्रन्थ का आमराय रूप पाठ करते रहने से प्रतीत में आता था कि जीने के अलावा अन्य सभा कमी रखते है। आचार्य देव के वह श्लोक जिनमत के स्याद्वाद सिद्धांत के प्रति बहमान और रूचि बढ़ाते है…….

Parikshamukh PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Is Marg par Aane ke bad Brahmachari avastha se hee ham Aachary svami samantabhadra virachit devagam stotr ka path karate the. Kahin arth samajh aata tha, kahin arth samajh nahin aata tha, phir bhi granth ka Aamaray roop path karate rahane se prateet mein aata tha ki jeene ke alava any sabha kami rakhate hai. Aachary dev ke vah shlok jinamat ke syadvad siddhant ke prati bahuman aur roochi badhate hai…………
Short Description of Parikshamukh PDF Book : After coming on this path, from the Brahmachari state itself, we used to recite the Acharya Swami Samantabhadra devised ‘Devgam Stotra’. Somewhere he could understand the meaning, somewhere he could not understand the meaning, yet by reading the common form of the text, it seemed that other than life, the gathering was lacking. That shloka of Acharya Dev promotes multitude and interest in the symmetrical principle of Jinmat………………
“यदि आप बार बार नहीं गिर रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आप कुछ नया नहीं कर रहे हैं।” ‐ वुडी एलन
“If you’re not failing every now and again, it’s a sign you’re not doing anything very innovative.” ‐ Woody Allen

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