प्रेमचंद साहित्य / Premchand Sahitya
पुस्तक का विवरण : जानवरों में गधा सबसे बुद्धिहीन समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को पहले दरजे का बेवकूफ कहना चाहते हैं तो उसे गधा कहते हैं। गधा सचमुच बेवकूफ है, या उसके सीघेपन, उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है, इसका निश्चय नहीं किया जा सकता। गायें सींग मारती हैं, ब्यायी हुई गाय तो अनायास ही सिहंनी का रूप धारण कर लेती है। कुत्ता भी बहुत गरीब जानवर है, लेकिन कभी-कभी उसे भी क्रोध आ ही जाता है ; लेकिन गधे को कभी क्रोध करते नहीं सुना, न देखा। जितना चाहों उस गरीब को मारो, चाहे जैसी खराब सड़ी हुई घास सामने डाल दो, उसके चेहरे पर कभी असंतोष की छाया भी न दिखायी देगी। वैशाख में चाहे आध बार कुलेल कर लेता हो ; पर हमने तो उसे कभी खुश होते नहीं देखा। उसके चेहरे पर क स्थायी विषाद स्थायी रूप से छाया रहता है। सुख-दुख, हानि-लाभ, किसी दशा में भी बदलते नहीं देखा।………………
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | प्रेमचंद साहित्य / Premchand Sahitya |
| Author | Munshi Premchand |
| Category | Literature Book in Hindi Novel Book in Hindi PDF Uncategorized Hindi Books | अवर्गीकृत |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 36 (Files) |
| Quality | Good |
| Size | 2.0 MB (ZIP) |
| Download Status | Available |
“आप जिस कार्य को कर रहे हैं उस पर पूरे मनोयोग से ध्यान केंद्रित करें। सूर्य की किरणों से उस समय तक अग्नि प्रज्जवलित नहीं होती है जब तक उन्हें केन्द्रित नहीं किया जाता है।” ‐ अलेक्जेंडर ग्राहम बैल
“Concentrate all your thoughts upon the work at hand. The sun’s rays do not burn until brought to a focus.” ‐ Alexander Graham Bell
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