राज-निवेश एवं राजसी कलायें : डॉ. द्विजेन्द्रनाथ शुक्ल द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – इतिहास | Raj-Nivesh Evan Rajasi Kalayen : by Dr. Dwijendranath Shukla Hindi PDF Book – History (Itihas)

राज-निवेश एवं राजसी कलायें : डॉ. द्विजेन्द्रनाथ शुक्ल द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - इतिहास | Raj-Nivesh Evan Rajasi Kalayen : by Dr. Dwijendranath Shukla Hindi PDF Book - History (Itihas)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name राज-निवेश एवं राजसी कलायें / Raj-Nivesh Evan Rajasi Kalayen
Author
Category, ,
Pages 268
Quality Good
Size 4 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : अत: मैं यह भी सूचित करना परमावश्यक है कि बड़े सौभाग्य कजी बात है कि पंजाबियों में एक संस्कृतज्ञ सिक्स श्री त्रिलोचन सिंह से साक्षात्कार हो गया जो यूनिवर्सिटी कैम्पस के संमीप प्रेस चला रहे है। इस संसार ने कमाल कर दिया और बड़े उत्साह और लग्न से काम किया है। सरदार त्रिलोचनसिंह अपनी वचन बध्दता के लिए……

Pustak Ka Vivaran : At: main yah bhee soochit karana paramavashyak hai ki bade saubhagy kaji bat hai ki panjabiyon mein ek sanskrtagy sikkh shri trilochan sinh se sakshatkar ho gaya jo Univarcity Campas ke sammip pres chala rahe hai. Is sansar ne kamal kar diya aur bade utsah aur lagn se kam kiya hai. Sardar Trilochanasinh apani vachan badhdata ke liye…………

Description about eBook : Therefore, it is also important to inform that it is a matter of great luck that a Sanskritist Sikh Trilochan Singh was interviewed in Punjabis who is running the Sammeep Press of University Campus. This world has done wonders and has worked with great enthusiasm and passion. Sardar Trilochan Singh for his promise…………..

“अच्छे विचारों को स्वतः ही नहीं अपनाया जाता है। उन्हें पराक्रमयुक्त धैर्य के साथ व्यवहार में लाया जाना चाहिए।” ‐ हायमैन रिकओवर
“Good ideas are not adopted automatically. They must be driven into practice with courageous patience.” ‐ Hyman Rickover

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