समीक्षा के सिद्धान्त / Samiksha Ke Siddhant
पुस्तक का विवरण / Book Details | |
Book Name | समीक्षा के सिद्धान्त / Samiksha Ke Siddhant |
Author | Dr. Satyendra |
Category | साहित्य / Literature, निबन्ध / Essay, नाटक / Drama, साहित्य / Literature, काव्य / Poetry, जीवनी / Biography, Jeevani, Kavya |
Language | हिंदी / Hindi |
Pages | 218 |
Quality | Good |
Size | 7 MB |
Download Status | Available |
सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये| | |
समीक्षा के सिद्धान्त का संछिप्त विवरण : हिंदी में एकांकियों की परम्परा हमें संस्कृत तथा बंगला से होकर भारतेन्दु युग में और तब से अब तक मिलतीहै | इस इतिहास में हमें मिलता है कि आधुनिक काल में इन एकांकियों में जिस काल का उद्घाटन हुआ है; उसमें पाश्च्यात्य एकांकियों का बहुत बड़ा हाथ है | आधुनिक काल से पूर्व एकांकियों में साहित्य का अंक अलग अंग होने का भाव नहीं था …….
Samiksha Ke Siddhant PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Hindi mein ekankiyon ki parampara hamen sanskrt tatha bangala se hokar bharatendu yug mein aur tab se ab tak milati hai. Is itihas mein hamen milata hai ki aadhunik kal mein in ekankiyon mein jis kal ka udghaatan hua hai, usamen paashchyaaty ekaankiyon ka bahut bada haath hai | aadhunik kaal se poorv ekaankiyon mein saahity ka ank alag ang hone ka bhaav nahin tha…………
Short Description of Samiksha Ke Siddhant PDF Book : In Hindi, the tradition of Ekals has been received through Sanskrit and Bangla in the Bharatendu era and henceforth. In this history we find that in the modern times, the time of the inauguration of these aunals has a huge hand of Western singers. Before the modern times, the number of literature in the uni…………..
“एक ऐसा व्यक्ति जिसने कभी गलती नहीं की है, उसने जीवन में कुछ नया करने का कभी प्रयास ही नहीं किया होता है।” ‐ अल्बर्ट आईंस्टिन
“A person who never made a mistake never tried anything new.” ‐ Albert Einstein
हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें