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शब्दों का विष / Shabdon Ka Vish

शब्दों का विष : सुमेर सिंह दइया द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - कहानी | Shabdon Ka Vish : by Sumer Singh Daiya Hindi PDF Book - Story (Kahani)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name शब्दों का विष / Shabdon Ka Vish
Author
Category, , , ,
Language
Pages 140
Quality Good
Size 2 MB
Download Status Available

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पुस्तक का विवरण : पीछे से दरवाजे की चौखट पर सहसा दादी का सिर दीखा और वह ऊँचें स्वर में बोली -जरा जल्दी करना। हरबार गलती हो गई कहकर तुम तो छुट्टी पा लेते हो, लेकिन इधर मेरी पूजा चौपट हो जाती है। कुछ सुना या नहीं , ठीक-ठीक कहना मुश्किल है। इस पर भी वह सोच रहा है कि पहले वह स्नान करेगा। इसके बाद पत्नी सारे कपडे धोकर नहाने……

Pustak Ka Vivaran : Peechhe se daravaje kee chaukhat par sahasa dadi ka sir deekha aur vah Unchen svar mein boli -jara jaldee karana. Harabar galati ho gayi kahakar tum to chhuttee pa lete ho, lekin idhar meree pooja chaupat ho jati hai. Kuchh suna ya nahin , theek-theek kahana mushkil hai. Is par bhee vah soch raha hai ki pahale vah snan karega. isake bad patni Sare kapade dhokar nahane…………
Description about eBook : Although English and many other languages of Europe have a long-standing strong tradition of detective novels of various kinds, in Hindi and Urdu, this variety of novels did not find its place. Even today, if we take popular entertainment-oriented novels topped, then ‘Chalu’ or as they are commonly called……………….
“किसी भी नींव का सबसे मजबूत पत्थर सबसे निचला ही होता है।” ‐ खलील ज़िब्रान (१८८३-१९३१), सीरियाई कवि
“The most solid stone in the structure is the lowest one in the foundation.” ‐ Kahlil Gibran (1883-1931),Syrian poet

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