सुन्दरकाण्ड पुनर्पाठ- मनोज श्रीवास्तव मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Sundarkaand Punarpaath- Manoj Shrivastava Hindi Book Free Download

पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name सुन्दरकाण्ड पुनर्पाठ / Sundarkand Punarpath
Author
Category
Language
Pages 680
Quality Good
Size 145 MB
Download Status Available
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सुन्दरकाण्ड पुनर्पाठ पुस्तक का कुछ अंशसुन्दरकांड जीवन के सम्पूर्ण सौन्दर्य का वाचक हैः इसका सौंन्दर्य पिछले पांच सौ वर्षों के सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य ‘रामचरितमानस’ के अंगी रस निर्वेद या भक्ति से व्युत्पन्न है। तुलसीदास ने अपने जीवन का अमृत निचोड़ कर सुन्दरकांड में प्रस्तुत किया है जो मध्यकालीन जीवनबोध का तो अतिक्रमण करता ही है, वर्तमान समय में भी जिसकी प्रासंगिकता ओर अर्थवत्ता चुनौती की तरह विद्यमान है………

Sundarkand Punarpath PDF Pustak in Hindi Ka Kuch Ansh : Sundarkand jeevan ke sampurn saundary ka vachak haih isaka saunndary pichhale panch sau varshon ke sarvashreshth mahakavy ramacharitamanas ke angee ras nirved ya bhakti se vyutpann hai. Tulasidas ne apane jeevan ka amrt nichod kar sundarkand mein prastut kiya hai jo madhyakaleen jeevanabodh ka to atikraman karta hee hai, vartaman samay mein bhee jiski prasangikata or arthavatta chunauti kee tarah vidyaman hai………
Short Passage of Sundarkand Punarpath Hindi PDF Book : Sunderkand is the epitome of all the beauty of life: its beauty is derived from the nirved or bhakti, the angi rasa of the best epic of the last five hundred years, ‘Ramcharitmanas’. Tulsidas has extracted the nectar of his life and presented it in Sunderkand, which encroaches on the medieval understanding of life, whose relevance and meaning exist as a challenge even in the present times……..
“एक मूल नियम है कि समान विचारधारा के व्यक्ति एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं। नकारात्मक सोच सुनिश्चित रुप से नकारात्मक परिणामो को आकर्षित करती है। इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति आशा और विश्वास के साथ सोचने को आदत ही बना लेता है तो उसकी सकारात्मक सोच से सृजनात्मक शक्तियों सक्रिय हो जाती हैं- और सफलता उससे दूर जाने की बजाय उसी ओर चलने लगती है” ‐ नार्मन विंसेन्ट पीएले
“There is a basic law that like attracts like. Negative thinking definitely attracts negative results. Conversely, if a person habitually thinks optimistically and hopefully, his positive thinking sets in motion creative forces — and success instead of eluding him flows toward him.” ‐ Norman Vincent Peale

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