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तब की बात और थी / Tab Ki Bat Aur Thi

तब की बात और थी : हरिशंकर परसाई द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - कहानी | Tab Ki Bat Aur Thi : by Harishankar Parsai Hindi PDF Book - Story (Kahani)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name तब की बात और थी / Tab Ki Bat Aur Thi
Author
Category, , , , ,
Language
Pages 124
Quality Good
Size 7.64 MB
Download Status Available

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

तब की बात और थी का संछिप्त विवरण : एक दिन बूढ़े सियार ने भेड़िये से कहा, “मालिक आज कल आप बड़े उदास रहते हो।” हर भेड़िये के आसपास २-४ सियार रहते ही हैं | जब भेड़िया अपना शिकार खा लेता है, तब ये सियार हड्डियों में लगे मांस को कुत्तर खाते हैं, और हड्डियाँ चूसते रहते हैं | ये भेड़िये के आसपास दुम हिलाते चलते हैं, उसकी सेवा करते हैं…….

Tab Ki Bat Aur Thi PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Ek Din boodhe siyar ne bhediye se kaha, “Malik aaj kal aap bade udas rahate ho.” Har bhediye ke Aaspas 2-4 siyar rahate hi hain . Jab bhediya apana shikar kha leta hai, tab ye siyar haddiyon mein lage mans ko kuttar khate hain, aur haddiyan choosate rahate hain . Ye bhediye ke aaspas dum hilate chalate hain, usaki seva karate hain………..
Short Description of Tab Ki Bat Aur Thi PDF Book : One day the old jackal said to the wolf, “Master, you are very sad these days.” Around 2–4 jackals live around every wolf. When the wolf eats its prey, these jackals eat the meat attached to the bones, and suck on the bones. They move the wolf around the tail, serve it ………..
“कल तो चला गया। आने वाले कल अभी आया नहीं है। हमारे पास केवल आज है। आईये शुरुआत करें।” मदर टेरेसा
“Yesterday is gone. Tomorrow has not yet come. We have only today. Let us begin.” Mother Teresa

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