यह तो सार्वजानिक पैसा है : विष्णु प्रभाकर द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Yah To Sarvajanik Paisa Hai : by Vishnu Prabhakar Hindi PDF Book – Social (Samajik)

यह तो सार्वजानिक पैसा है : विष्णु प्रभाकर द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - सामाजिक | Yah To Sarvajanik Paisa Hai : by Vishnu Prabhakar Hindi PDF Book - Social (Samajik)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name यह तो सार्वजानिक पैसा है / Yah To Sarvajanik Paisa Hai
Author
Category, , ,
Pages 120
Quality Good
Size 40 MB
Download Status Available

यह तो सार्वजानिक पैसा है का संछिप्त विवरण : महात्मा गांधी उन महापुरुषों में से थे, जिन्होंने मनुष्य के चरित्र को सबसे अधिक महत्व दिया। वह मानते थे कि’ समाज की बुनियादी इकाई मनुष्य है। यदि वह अपने को सुधार ले तो समाज अपने आप सुधर जायगा……….

Yah To Sarvajanik Paisa Hai PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Mahatma Gandhi un Mahapurushon mein se the, Jinhonne manushy ke charitra ko sabase adhik mahatv diya. Vah Manate the ki samaj ki buniyadi ikai manushy hai. Yadi vah apane ko sudhar le to samaj apane aap sudhar jayega……….
Short Description of Yah To Sarvajanik Paisa Hai PDF Book : Mahatma Gandhi was one of those great men who gave the most importance to the character of man. He believed that the basic unit of society is man. If he reforms himself, the society will automatically improve……..
“अमरीका ने मानवाधिकारों की खोज नहीं की। सही मायने में तो बात इससे उल्टी है। मानव अधिकारों ने अमरीका की खोज की।” जिमी कार्टर, ३९वें अमरीकी राष्ट्रपति
“America did not invent human rights. In a very real sense human rights invented America.” Jimmy Carter, 39th President of America

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