अमेरिका की श्रेष्ठ कहानियाँ : मोजेज माइकल द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – कहानी | America Ki Shreshth Kahaniyan : by Moses Michael Hindi PDF Book – Story (Kahani)

अमेरिका की श्रेष्ठ कहानियाँ : मोजेज माइकल द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - कहानी | America Ki Shreshth Kahaniyan : by Moses Michael Hindi PDF Book - Story (Kahani)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name अमेरिका की श्रेष्ठ कहानियाँ / America Ki Shreshth Kahaniyan
Author
Category, , ,
Language
Pages 107
Quality Good
Size 1.3 MB
Download Status Available

अमेरिका की श्रेष्ठ कहानियाँ का संछिप्त विवरण : अभी भी एक ऐसा पवित्र स्थान होना चाहिए, जहाँ कोई अजनबी न घुस सके। लेकिन इस शाम एक पैगंबरी सहानुभूति ने उस सुसंस्कृत और शिक्षित नौजवान को इन सरल पर्वतवासियों के आगे अपने दिल की बात कहने को बाध्य कर दिया था, और उन्हें बाध्य कर दिया था कि वे उसी निबंध आत्म-विश्वास के साथ उसे जवाब दें……

America Ki Shreshth Kahaniyan PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Abhi bhi Ek Aisa Pavitra sthan hona chahiye, jahan koi Ajnabi na ghus sake. Lekin is sham ek Paigambari Sahanubhooti ne us Susanskrt aur shikshit Naujavan ko in saral Parvatavasiyon ke aage apne dil ki bat kahane ko badhy kar diya tha, aur unhen badhy kar diya tha ki ve usi Nibandh aatm-vishvas ke sath use javab den………
Short Description of America Ki Shreshth Kahaniyan PDF Book : There should still be a holy place where no stranger can enter. But this evening a prophetic sympathy had compelled the cultured and educated young man to speak his heart out to these simple mountain dwellers, and forced them to respond to him with the same essay self-confidence… ……
“हर सुबह जब मैं अपनी आंखे खोलता हूं तो अपने आप से कहता हूं कि आज मुझमें स्वयं को खुश या उदास रखने का सामर्थ्य है न कि घटनाओं में। मैं इस बात को चुन सकता हूं कि यह क्या होगी। कल तो जा चुका है, कल अभी आया नहीं है। मेरे पास केवल एक दिन है, आज तथा मैं दिन भर प्रसन्न रहूंगा।” ग्रोचो मार्क्स
“Each morning when I open my eyes I say to myself: I, not events, have the power to make me happy or unhappy today. I can choose which it shall be. Yesterday is dead, tomorrow hasn’t arrived yet. I have just one day, today, and I’m going to be happy in it.” Groucho Marx

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