द रिचेस्ट मैन इन बेबीलोन : जॉर्ज एस. क्लासन द्वारा हिंदी ऑडियो बुक | The Richest Man In Babylon : by George S. Clason Hindi Audiobook

द रिचेस्ट मैन इन बेबीलोन : जॉर्ज एस. क्लासन द्वारा हिंदी ऑडियो बुक | The Richest Man In Babylon : by George S. Clason Hindi Audiobook
पुस्तक का विवरण / Book Details
AudioBook Name द रिचेस्ट मैन इन बेबीलोन / The Richest Man In Babylon
Author
Category, ,
Language
Duration 5:02 hrs
Source Youtube

The Richest Man In Babylon Hindi Audiobook का संक्षिप्त विवरण : किसी देश की समृद्धि इसके नागरिकों की आर्थिक समृद्धि पर निर्भर करती है। यह पुस्तक सफलता के बारे में है। सफलता का अर्थ है हमारे प्रयासों और योग्यताओं के परिणामस्वरूप मिलने वाली उपलब्धियाँ। हमारी सफलता की कुंजी है उचित तैयारी। हमारे काम हमारे विचारों जितने ही बुद्धिमत्तापूर्ण हो सकते हैं और हमारे विचार हमारे ज्ञान जितने ही बुद्धिमत्तापूर्ण हो सकते हैं। ख़ाली पर्स का इलाज कले वाली इस पुस्तक को आर्थिक ज्ञान की मार्गदर्शिका कहा गया है। दरअसल यही इसका लक्ष्य है। यह महत्वाकांक्षी लोगों को आर्थिक सफलता का ऐसा ज्ञान देती है, जिसकी मदद से वे धन हासिल कर सकते हैं, उसे अपने पास रख सकते हैं और उससे ज़्यादा घन कमा सकते हैं। आगे के पृष्ठों में हम बैबिलॉन में चलेंगे, जहाँ घन के मूलभूत सिद्धांत विकसित किए गए थे, जिन्हें आज दुनिया भर में जाना और माना जाता है। लेखक यह आशा करता है कि इस पुस्तक में पाठकों को अपने बैंक अकाउंट में वृद्धि करने, अधिक वित्तीय सफलता पाने और मुश्किल वित्तीय समस्याओं के समाधान की प्रेरणा मिलेगी। दुनिया भर के हज़ारों पाठकों ने इसके बारे में यही राय व्यक्त की है।
लेखक उन सभी बिज़नेस एक्ज़ीक्यूटिव्ज़ को धन्यवाद देना चाहता: है, जिन्होंने अपने मित्रों, रिश्तेदारों, कर्मचारियों और सहयोगियों को यह पुस्तक बड़ी संख्या में बाँटी है। इस पुस्तक को सफल लोगों ने पसंद किया, क्योंकि ये सफल लोग भी इन्हीं सिद्धांतों की बदौलत सफल बने थे। बैबिलोन प्राचीन विश्व का सबसे दौलतमंद शहर इसलिए था, क्योंकि इसके नागरिक बहुत अमीर थे। वे धन का मूल्य समझते थे। वे धन को हासिल करने, उसे बनाए रखने और उससे अधिक धन कमाने के दमदार आर्थिक सिद्धांतों पर अमल करते थे। इन सिद्धांतों की बदौलत वे दौलतमंद बन गए और हम भी यही तो चाहते हैं।

“अपने डैनों के ही बल उड़ने वाला कोई भी परिंदा बहुत ऊंचा नहीं उड़ता।” ‐ विलियम ब्लेक (१७५७-१८२७), अंग्रेज़ कवि व कलाकार
“No bird soars too high if he soars with his own wings.” ‐ William Blake (1757-1827), British Poet and Artist

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