भगवतगीता का मनोविज्ञान भाग – २ (न जन्म न मृत्यु) : ओशो द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Bhagwat Geeta Ka Manovigyan Part – 2 (Na Janm Na Mrityu) : by Osho Hindi PDF Book – Social (Samajik)

Book Nameभगवतगीता का मनोविज्ञान भाग - २ (न जन्म न मृत्यु) / Bhagwat Geeta Ka Manovigyan Part - 2 (Na Janm Na Mrityu)
Author
Category, , , ,
Language
Pages 350
Quality Good
Size 21.5 MB

पुस्तक का विवरण : आत्मा, न जन्म लेती है, न मरती है; न उसका प्रारंभ है, न उसका अंत है-जब हम ऐसा कहते हैं, तो थोड़ी-सी भूल हो जाती है। इसे दूसरे ढंग से कहना ज्यादा सत्य के करीब होगा: जिसका जन्म नहीं होता, जिसकी मृत्यु नहीं होती, जिसका कोई प्रारंभ नहीं है, जिसका कोई अंत नहीं है, ऐसे अस्तित्व को ही हम आत्मा कहते हैं……….

भगवतगीता का मनोविज्ञान भाग – २ (न जन्म न मृत्यु) : ओशो द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Bhagwat Geeta Ka Manovigyan Part – 2 (Na Janm Na Mrityu) : by Osho Hindi PDF Book – Social (Samajik)

Pustak Ka Vivaran :  Aatma, na janm leti hai, na Marti hai; na usaka prarambh hai, na usaka ant hai-jab ham aisa kahate hain, to thodi-si bhool ho jati hai. Ise doosare dhang se kahana jyada saty ke kareeb hoga: jiska janm nahin hota, jiski mrtyu nahin hoti, jisaka koi prarambh nahin hai, jisaka koi ant nahin hai, aise astitv ko hi ham aatma kahate hain……….

Description about eBook : The soul is neither born nor dies; It has neither a beginning nor an end – when we say so, a slight mistake is made. To say it in another way would be closer to the truth: that which is not born, which does not die, which has no beginning, which has no end, such existence is what we call the soul………

“जब आप अपने मित्रों का चयन करते हैं तो चरित्र के स्थान पर व्यक्तित्व को न चुनें।” डब्ल्यू सोमरसेट मोघम
“When you choose your friends, don’t be short-changed by choosing personality over character.” W. Somerset Maugham

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