न्यायकुसुमाज्जलि: श्री उदयनाचार्य द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – ग्रन्थ | Nyayakusumanjjali : by Shri Udayanacharya Hindi PDF Book – Granth

न्यायकुसुमाज्जलि: श्री उदयनाचार्य द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - ग्रन्थ | Nyayakusumanjjali : by Shri Udayanacharya Hindi PDF Book - Granth
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name न्यायकुसुमाज्जलि / Nyayakusumanjjali
Author
Category, , , , ,
Language
Pages 302
Quality Good
Size 82 MB
Download Status Available

न्यायकुसुमाज्जलि का संछिप्त विवरण : दूसरे दिन राजा ने सब पण्डितों को और उस बौद्ध आचार्य को बुलाकर कहा कि अब आप दोनों मेरे सामने शास्त्रार्थ करें। उन दोनों पक्षों का विचार बहुत दिन तक चलता रहा। अंत में बौद्ध आचार्य अपने मन में अपनी पराजय मानकर, शास्त्रार्थ को छोड़कर अन्य मायामय उपायों का अवलम्बन करने लगे………

Nyayakusumanjjali PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Doosare din Raja ne sab panditon ko aur us bauddh aachary ko bulakar kaha ki ab aap donon mere samane shastrarth karen. Un donon pakshon ka vichar bahut din tak chalata raha. Ant mein bauddh aachary apane man mein apani parajay manakar, shastrarth ko chhodakar any mayamay upayon ka avalamban karane lage…………
Short Description of Nyayakusumanjjali PDF Book : The next day the king called all the priests and that Buddhist master and said that now both of you should debate before me. The idea of ​​both those parties went on for a long time. In the end, the Buddhist Acharya accepted his defeat in his mind, leaving the debate and began to pursue other mendacious measures………..
“आप प्रत्येक ऐसे अनुभव जिसमें आपको वस्तुत डर सामने दिखाई देता है, से बल, साहस तथा विश्वास अर्जित करते हैं। आपको ऐसे कार्य अवश्य करने चाहिए जिनके बारे में आप सोचते हैं कि आप उनको नहीं कर सकते हैं।” ‐ एलेनोर रुज़वेल्ट
“You gain strength, courage, and confidence by every experience in which you really stop to look fear in the face. You must do the thing which you think you cannot do.” ‐ Eleanor Roosevelt

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