पातंजल योग दर्शन तथा हरि भदरी योग वंशिका : विशारद यशोविजयोपध्याया और सुखलाल द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक | Patanjal Yog Darshan Tatha Hari Bhadri Yog Vinshika : by Vishard Yashovijayopadhyaya And Sukhalal Hindi PDF Book

Book Nameपातंजल योग दर्शन तथा हरि भदरी योग वंशिका / Patanjal Yog Darshan Tatha Hari Bhadri Yog Vinshika
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Category,
Pages 288
Quality Good
Size 3 MB
Download Status Available

पातंजल योग दर्शन तथा हरि भदरी योग वंशिका का संछिप्त विवरण : पाठकों के समक्ष प्रस्तुत पुस्तक उपस्थित करते हुए इसका संक्षेपमै परिचय कराना जरूरी है। शुरूमें प्रस्तावना रूपमे योगदर्शन पर एक विस्तृत निबन्ध दें दिया गया है जिसमें योग तथा योग-सम्वन्धी साहित्य आदिसे सम्बन्ध रखनेवाली अनेक बातों पर सप्रमाण विचार किया गया है……

Patanjal Yog Darshan Tatha Hari Bhadri Yog Vinshika PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Pathakon ke samaksh prastut pustak upasthit karate hue isaka sankshepamai parichay karana jaroori hai. shuroomen prastavana roopame yogadarshan par ek vistrt nibandh de diya gaya hai jisamen yog tatha yog-samvandhi sahity adise sambandh rakhanevali anek baton par sapraman vichar kiya gaya hai.…………
Short Description of Patanjal Yog Darshan Tatha Hari Bhadri Yog Vinshika PDF Book : Presenting the book presented to the readers, it is necessary to introduce it briefly. Initially, a detailed essay on introduction of Yoga and Yoga has been taken into consideration on many issues related to yoga and yoga-related literature……………
“जब दूसरे व्यक्ति सोए हों, तो उस समय अध्ययन करें; उस समय कार्य करें जब दूसरे व्यक्ति अपने समय को नष्ट करते हैं; उस समय तैयारी करें जब दूसरे खेल रहे हों ; और उस समय सपने देखें जब दूसरे केवल कामना ही कर रहे हों।” – विलियम आर्थर वार्ड
“Study while others are sleeping; work while others are loafing; prepare while others are playing; and dream while others are wishing.” -William Arthur Ward

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