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सडाको / Sadako

सडाको : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - बच्चों की पुस्तक | Sadako : Hindi PDF Book - Children's Book (Bachchon Ki Pustak)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name सडाको / Sadako
Author
Category, ,
Language
Pages 49
Quality Good
Size 4 MB
Download Status Available

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सडाको का संछिप्त विवरण : सडाको तेज़ी से रसोई में माँ के पास पास गई और रोते हुए बोली, “जल्दी से नाश्ता दे दो, बहुत देरी हो रही है. मुझे आज मेले में जाना है.” धतम उसे मेला मत कहो. छह अगस्त के दिन हम उन लोगों को याद करते हैं जो हमारे शहर हिरोशिमा में एटम-बम्ब गिरने के कारण मरे थे. यह एक यादगार-दिवस है. आज ही के दिन उस मनहूस बम्ब में तुम्हारी दादी मरी थीं. यह एक अशुभ दिन है………

Sadako PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : sadako tezI se Rasoi mein man ke pas pas gayi aur Rote huye boli, “Jaldi se Nashta de do, Bahut deri ho rahi hai. Mujhe Aaj mele mein jana hai.” Dhatam use mela mat kaho. Chhah Agust ke din ham un logon ko yad karate hain jo hamare shahar hiroshima mein etam-bamb girane ke karan mare the. Yah Ek Yadgar-Divas hai. Aaj hee ke din us Manhoos bamb mein Tumhari Dadi Mari theen. Yah Ek Ashubh din hai………….
Short Description of Sadako PDF Book : Sadako quickly went to her mother in the kitchen and said crying, “Give breakfast fast, there is a lot of delay. I have to go to the fair today. ” Dhatam don’t call it fair. On August 6, we remember those people who died in our city of Hiroshima due to an atom bomb. This is a memorable day. Today, your grandmother died in that wretched bomb. It’s an inauspicious day ………….
“हमें न अतीत पर कुढ़ना चाहिए और न ही हमें भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए; विवेकी व्यक्ति केवल वर्तमान क्षण में ही जीते हैं।” ‐ चाणक्य
“We should not fret for what is past, nor should we be anxious about the future; men of discernment deal only with the present moment.” ‐ Chanakya

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