इंसान का नसीबा : मिखाइल शोलोखोव | Insaan Ka Naseeba : By Mikhail Sholokhov Hindi Book
इंसान का नसीबा पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : सत्तांकि प्रख्यात रूसी उपन्यासकार शोलोखो की ख्याति उनके महाकाव्यात्मक उपन्यास धीरे हे दोन रे पर आधारित है लेकिन उन्होंने कुछ ऐसी अपेक्षाकृत छोटे कलेवर की कथाकृतियाँ भी रखी हैं जो रूसी गृह बुद्ध के अलावा दूसरी उथल-पुथल का चित्रण करती हैं ‘इन्सान का नसीबा ऐसा ही एक लघु उपन्यास है जो युद्ध की विभीषिका का और उस विभीषिका के दीय मनुष्य की जिजीविषा और सामान्य जनों की मानवीयता का अप्रतिम चित्रण करता है। इस उपन्यास का केन्द्रीय पात्र एक ड्राइवर है जो दूसरे महायुद्ध के दौरान अपनी पत्नी और बच्चों को गंवा बैठता है। न सिर्फ यह बल्कि यह जर्मनों के हाथ पड़ कर तरह-तरह की यातनाओं से भी गुजरता है। इसके बावजूद जीवन और उसकी गरिमा में उसकी आस्था कम नहीं होती। वह युद्ध में अपने माता-पिता गंवा बैठने वाले एक अनाथ बालक को एक तरह से गोद से लेता है और पालने लगता है। कुद्ध की विभीषिका के शिकार दो अभागे इस प्रकार साथ आ मिलते हैं और एक-दूसरे के जीवन के अभाव के पूरक बन जाते हैं।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | इंसान का नसीबा | Insaan Ka Naseeba |
| Author | Mikhail Sholokhov |
| Category | Novel Book in Hindi PDF |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 90 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“प्रत्येक शिशु एक संदेश लेकर आता है कि भगवान मनुष्य को लेकर हतोत्साहित नहीं है।” रविन्द्रनाथ टैगोर
“Every child comes with the message that God is not yet discouraged of man.” Rabindranath Tagore
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