विराटा की पदमिनी : वृन्दावनलाल वर्मा | Virata ki Padmini : By Vrindavanlal Verma Hindi Book
विराटा की पदमिनी वृंदावनलाल वर्मा द्वारा लिखित एक ऐतिहासिक उपन्यास है। इस पुस्तक में भारतीय इतिहास की एक रोचक और महत्वपूर्ण घटना का वर्णन किया गया है। कहानी की पृष्ठभूमि प्राचीन भारत में सेट की गई है और इसमें वीरता, प्रेम, और बलिदान के तत्वों का समावेश है।
उपन्यास की मुख्य पात्र पद्मिनी है, जो अपनी साहस और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। कहानी में उसके जीवन के संघर्ष, उसकी वीरता, और उसकी व्यक्तिगत यात्रा को विस्तार से दर्शाया गया है। यह उपन्यास न केवल एक मनोरंजक कथा है, बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास की समृद्ध धरोहर को भी उजागर करता है।
वृंदावनलाल वर्मा के लेखन की विशेषता उनकी भाषा की सजीवता और ऐतिहासिक घटनाओं का सजीव चित्रण है। उन्होंने पात्रों को इस तरह से प्रस्तुत किया है कि वे जीवंत प्रतीत होते हैं और पाठक उनकी यात्रा के साथ जुड़ जाते हैं
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | विराटा की पदमिनी | Virata ki Padmini |
| Author | Vrindavanlal Verma |
| Category | Novel Book in Hindi PDF |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 272 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“सृजन का हर कार्य पहले ध्वंस के एक कार्य से शुरू होता है।” ‐ पेब्लो पिकासो
“Every act of creation is first of all an act of destruction.” ‐ Pablo Picasso
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