आहार ही औषध है 1942 : भवानी प्रसाद द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक | Ahar Hi Aushadh Hai 1942 : by Bhawani Prasad Hindi PDF Book

आहार ही औषध है 1942 : भवानी प्रसाद द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक | Ahar Hi Aushadh Hai 1942 : by Bhawani Prasad Hindi PDF Book
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name आहार ही औषध है 1942 / Ahar Hi Aushadh Hai 1942
Author
Category, ,
Pages 214
Quality Good
Size 10.46 MB
Download Status Available

आहार ही औषध है 1942 का संछिप्त विवरण : भूगोल के सारे प्राणी रोगी होने पर अपने रोगों की चिकित्सा आप कर लेते हैं यह प्राकृतिक नियम सर्वत्र देखने में आता है, किन्तु उनमें सर्वश्रेष्ठ मनुष्य ही अपने रोग में अन्यों की सहायता का आश्रय लेता है | प्रकृति तो स्वयं अपने प्रयत्न से ही रोग के रूप में आपके देह के दोषों को आपके देह से बाहर निकाल कर आपको निरोग व स्वस्थ रखना चाहती है………

Ahar Hi Aushadh Hai 1942 PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Bhoogol ke sare prani rogi hone par apane rogon ki chikitsa ap kar lete hain yah prakrtik niyam sarvatr dekhane mein ata hai, kintu unamen sarvashreshth manushy hi apane rog mein anyon ki sahayata ka ashray leta hai. Prakrti to svayan apane prayatn se hi rog ke roop mein apake deh ke doshon ko apake deh se bahar nikal kar apako nirog va svasth rakhana chahati hai……….
Short Description of Ahar Hi Aushadh Hai 1942 PDF Book : When all the creatures of the geography are patient, you can take care of their diseases; this natural law comes into view everywhere, but the best man in them takes refuge in the help of others in his own disease. Nature, by its own self, wants to keep your body out of your body as a disease and keep you healthy and healthy………..
“क्रोध कभी भी बिना कारण नहीं होता, लेकिन कदाचित ही यह कारण सार्थक होता है।” ‐ बेंजामिन फ्रेंकलिन
“Anger is never without a reason, but seldom with a good one.” ‐ Benjamin Franklin

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3 thoughts on “आहार ही औषध है 1942 : भवानी प्रसाद द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक | Ahar Hi Aushadh Hai 1942 : by Bhawani Prasad Hindi PDF Book”

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