अनंत की पुकार : ओशो द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Anant Ki Pukar : by Osho Hindi PDF Book – Social (Samajik)

Book Nameअनंत की पुकार / Anant Ki Pukar
Author
Category, , ,
Language
Pages 143
Quality Good
Size 1.3 MB

पुस्तक का विवरण : बुद्ध ने कहा, मेरे पीछे बहुत लोग हैं, जब तक वे भी मोशक्ष में प्रविष्ट नहीं हो जाते, तब तक मैं अकेला मोक्ष में प्रविष्ट हो जाऊं? इतना कठोर, इतना क्रूर, इतना हिंसक मैं नहीं हूं। मैं रुकूंगा, प्रतीक्षा करूंगा, बहुत लोग हैं। मेरा शांत मन तो यही कहता है कि मैं अंतिम आदमी ही होऊंगा मोक्ष में प्रवेश करने वाला, पहले सारे लोग प्रविष्ट हो जाएं……..

अनंत की पुकार : ओशो द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Anant Ki Pukar : by Osho Hindi PDF Book – Social (Samajik)

Pustak Ka Vivaran : Buddh Ne kaha, mere peechhe bahut log hain, jab tak ve bhi moshaksh mein pravisht nahin ho jate, tab tak main akela moksh mein pravisht ho jaoon? Itna kathor, itana kroor, itana hinsak main nahin hoon. Main Rukoonga, pratiksha karoonga, bahut log hain. Mera shant man to yahi kahata hai ki main antim Aadmi hi hooonga moksh mein pravesh karne vala, pahale sare log pravisht ho jayen……..

Description about eBook : Buddha said, there are many people behind me, until they also enter moksha, should I enter salvation alone? I am not so harsh, so cruel, so violent. I’ll wait, wait, there are many people. My calm mind only says that I will be the last person to enter salvation, first all the people should enter……..

“शुरू में वह कीजिए जो आवश्यक है, फिर वह जो संभव है और अचानक आप पाएंगे कि आप तो वह कर रहे हैं जो असंभव की श्रेणी में आता है।” असीसी के संत फ़्रांसिस (११८२-१२२६), इतालवी साधु
“Start by doing what’s necessary; then do what’s possible; and suddenly you are doing the impossible.” St. Francis of Assisi (1182-1226), Italian Saint

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