करवा चौथ व्रत कथा (साहूकार की बेटी की कहानी) : हिंदी ऑडियोबुक | Karva Chauth Vrat Katha (Sahukar Ki Beti Ki Kahani) : Hindi Audiobook

करवा चौथ व्रत कथा (साहूकार की बेटी की कहानी) : हिंदी ऑडियोबुक | Karva Chauth Vrat Katha (Sahukar Ki Beti Ki Kahani) : Hindi Audiobook
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Karva Chauth Vrat Katha (Sahukar Ki Beti Ki Kahani) Hindi Audiobook का संक्षिप्त विवरण : एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। सेठानी के सहित उसकी बहुओं और बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा था। रात्रि को साहकार के लड़के भोजन करने लगे तो उन्होंने अपनी बहन से भोजन के लिए कहा। इस पर बहन ने बताया कि उसका आज उसका व्रत है और वह खाना चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। जो ऐसा प्रतीत होता है जैसे चतुर्थी का चांद हो। बहन ने अपनी भाभी से भी कहा कि चंद्रमा निकल आया है व्रत खोल लें, लेकिन भाभियों ने उसकी बात नहीं मानी और व्रत नहीं खोला।  बहन को अपने भाईयों की चतुराई समझ में नहीं आई और उसे देख कर करवा उसे अर्घ्‍य देकर खाने का निवाला खा लिया।  जैसे ही वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और तीसरा टुकड़ा मुंह में डालती है तभी उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बेहद दुखी हो जाती है। उसकी भाभी सच्चाई बताती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं। इस पर करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं करेगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। शोकातुर होकर वह अपने पति के शव को लेकर एक वर्ष तक बैठी रही और उसके ऊपर उगने वाली घास को इकट्ठा करती रही। उसने पूरे साल की चतुर्थी को व्रत किया और अगले साल कार्तिक कृष्ण चतुर्थी फिर से आने पर उसने पूरे विधि-विधान से करवा चौथ व्रत किया, जिसके फलस्वरूप करवा माता और गणेश जी के आशीर्वाद से उसका पति पुनः जीवित हो गया।

पुस्तक का विवरण / Book Details
AudioBook Name करवा चौथ व्रत कथा (साहूकार की बेटी की कहानी) / Karva Chauth Vrat Katha (Sahukar Ki Beti Ki Kahani)
Author
CategoryFast - Vrat Book in Hindi PDF Hindi Audiobooks Karva Chauth Book in Hindi PDF
Duration 8:59 Mins
Source Youtube
““कठिनाईयों का अर्थ आगे बढ़ना है, न कि हतोत्साहित होना। मानवीय भावना का अर्थ द्वन्द्व से और अधिक मजबूत होना होता है।” ‐ विलियम एल्लेरी चैन्निंग
“Difficulties are meant to rouse, not discourage. The human spirit is to grow strong by conflict.” ‐ William Ellery Channing

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