नागमणि : अमृता प्रीतम | Nagamani : By Amrita Pritam Hindi Book
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पुस्तक के कुछ अंश :
“तुम मेरे लिए उस औरत की तरह होगी, जिसका कोई नाम नहीं होता,
या उसका कोई भी नाम हो सकता है।” “यह तो बहुत बड़ा दर्जा है!”
“क्या मतलब?”
“ख़ुदा का भी कोई नाम नहीं होता और उसका कोई भी नाम हो सकता है!” “छोटी बातों को ख़ुदा से मिला दें,
तो वे बड़ी नहीं हो जाती।”
“कई बातें ऐसी भी होती हैं, जो छोटी होने या बड़ी होने से बेनियाज़ होती हैं!”
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | नागमणि | Nagamani |
| Author | Amrita Pritam |
| Category | Novel in Hindi PDF Book |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 120 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“स्वत्व (आत्म तत्व) कोई बनी बनाई वस्तु नहीं होती है, कर्म के चयन के परिणाम स्वरूप इसका निरन्तर निर्माण करना पड़ता है।” ‐ जॉन ड्यूई
“The self is not something ready-made but something in continuous formation through choice of action.” ‐ John Dewey
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