चौबे का चिट्ठा : बाबू बंकिमचन्द्र चटर्जी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – साहित्य | Chaube Ka Chittha : by Babu Bankim Chandra Chatarji Hindi PDF Book – Literature (Sahitya)

चौबे का चिट्ठा : बाबू बंकिमचन्द्र चटर्जी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - साहित्य | Chaube Ka Chittha : by Babu Bankim Chandra Chatarji Hindi PDF Book - Literature (Sahitya)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name चौबे का चिट्ठा / Chaube Ka Chittha
Author
Category, , , , ,
Language
Pages 146
Quality Good
Size 4 MB
Download Status Available

पुस्तक का बिवरण : बहुत से लोग चिदानन्द को पागल कहते थे। उसकी चित्तवृत्ति कुछ विल्नक्षण प्रकार की थी। उसकी बातचीत, कामकाज, रहन-सहन, आदि सभी बातें अनोखी थीं. यह बात नहीं कि बह कुछ लिखा पढ़ा नहीं था। उसे कुछ अंग्रेजी और कुछ संस्कृत आती थी। किन्तु जिस विधा से अर्थपार्जन न हो, वह विधा किस काम की ……..

Pustak Ka Vivaran : Bahut se log chidanand ko pagal kahate the. Usaki chittavrtti kuchh vilakshan prakar kee thee. usaki batacheet, kamakaj, Rahan-sahan, aadi sabhi baten anokhi theen. Yah bat nahin ki vah kuchh likha padha nahin tha. Use kuchh angreji aur kuchh sanskrt aati thi. Kintu jis vidha se arthoparjan na ho, vah vidha kis kam ki………….

Description about eBook : Many people called Chidanand as mad. His mentality was of some extraordinary type. His conversation, work, living, etc. all things were unique. It does not matter that he did not read anything written. He used to have some English and some Sanskrit. But the mode which does not mean meaning,………..

“अगर सफलता आपके आदर्शों से मेल नहीं खाती – यदि यह दुनिया को अच्छी लगती हो लेकिन आपको अपने मन में नहीं अच्छी लगती – तो यह सफलता नहीं है।” एना क्विन्ड्लेन
“If success is not on your terms – if it looks good to the world but does not feel good in your own heart – it is no success at all.” Anna Quindlen

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