गांधी को समझें : धर्मपाल द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Gandhi Ko Samajhen : by Dharmpal Hindi PDF Book – Social (Samajik)

Book Nameगांधी को समझें / Gandhi Ko Samajhen
Author
Category, ,
Language
Pages 150
Quality Good
Size 6.5 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : अभी तक ये पुस्तकें मुख्य रूप से अंग्रेजी में ही है | उसका एक विशेष कारन यह है कि उसमे समाविष्ट दस्तावेज सन १८०० आसपास अंग्रेजों और अन्य यूरोपीय लोगों ने अंग्रेजी में ही लिखे है | प्रारम्भ में ही यह सब हिंदी अथवा अन्य भारतीय भाषा में प्रकाशित जकरना बहुत मुश्किल लगता था……..

Pustak Ka Vivaran : Abhi tak ye pustaken mukhy roop se angreji mein hee hai. Usaka ek vishesh karan yah hai ki usame samavisht dastavej san  1800  aasapas angrejon aur any yooropeey logon ne angreji mein hee likhe hai. Prarambh mein hee yah sab hindi athava any bharatiy bhasha mein prakashit jakarana bahut mushkil lagata tha…………

Description about eBook : So far these books are mainly in English. One of the special reasons for this is that documents contained therein are written in English only around 1800 by the British and other European people. Initially it was very difficult to publish all this in Hindi or other Indian languages……………

“ग्राहक हमारे लिए एक विशिष्ट अतिथि है। वह हम पर निर्भर नहीं है। हम ग्राहक पर निर्भर हैं। वह हमारे कार्य में व्यवधान नहीं है – बल्कि वह इसका उद्देश्य है। हम ग्राहक की सेवा कर कोई उपकार नहीं कर रहे। वह सेवा का मौका देकर हम पर उपकार कर रहा है।” ‐ महात्मा गांधी
“A customer is the most important visitor on our premises. He is not dependent on us. We are dependent on him. He is not an interruption in our work – he is the purpose of it. We are not doing him a favour by serving him. He is doing us a favour by giving” ‐ Mahatma Gandhi

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