गूढ़ार्थ भजन मंजरी / Gudarth Bhajan Manjari
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गूढ़ार्थ भजन मंजरी पीडीऍफ़ पुस्तक का संछिप्त विवरण : आप हरी सुख रूप सदा सत, पूरण चेतन एक अपारा। मैं निज दास सदा पद सेवक, तार
करो भव की भव धारा ॥ हूं अप खानि महामति मूरख, ना लप नेम न जानत यारा। पार करो अब आप सनातन,
“रामप्रकाश” अधार तुम्हारा ॥ ज्ञान अपार विचार अखण्डित, लाग रही घट एक हि धारा। सार निजानन्द पूरण
आतम, दूर किये भ्रम भेद विकारा.
Gudarth Bhajan Manjari PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran :
Short Description of Gudarth Bhajan Manjari Hindi PDF Book
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | गूढ़ार्थ भजन मंजरी / Gudarth Bhajan Manjari |
| Author | Swami Ramprakashacharya |
| Category | Kavitavali Book in Hindi PDF Kavya Book in Hindi PDF Literature Book in Hindi Poem Book in Hindi PDF |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 60 |
| Quality | Good |
| Size | 18.5 MB |
| Download Status | Available |
“मित्र वे दुर्लभ लोग होते हैं जो हमारा हालचाल पूछते हैं और उत्तर सुनने को रुकते भी हैं।” एड कनिंघम
“Friends are those rare people who ask how we are and then wait to hear the answer.” Ed Cunningham
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