हरियाली ही हरियाली उर्फ़ भोजन कहाँ से आता है : विनोद रायना द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Hariyali Hi Hariyali Urf Bhojan Kahan Se Aata Hai : by Vinod Raina Hindi PDF Book – Social (Samajik)

हरियाली ही हरियाली उर्फ़ भोजन कहाँ से आता है : विनोद रायना द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - बच्चों की पुस्तक | Hariyali Hi Hariyali Urf Bhojan Kahan Se Aata Hai : by Vinod Raina Hindi PDF Book - Children's Book (Bachchon Ki Pustak)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name हरियाली ही हरियाली उर्फ़ भोजन कहाँ से आता है / Hariyali Hi Hariyali Urf Bhojan Kahan Se Aata Hai
Author
Category, ,
Language
Pages 20
Quality Good
Size 3 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : किसी जंगल की सुंदरता की चर्चा जब हम करते हैं तो कौन-सी बात एकदम जबान पर आती है? यही न कि “कितनी हरी-भरी जगह है वह !” कश्मीर, शिमला, दार्जिलिंग और अन्य किसी ऐसी जगह की बातें करें तो यही वाक्य मुंह से निकलता है और किसी गांव की बात करें…….

Pustak Ka Vivaran : Kisi Jangal ki Sundarta ki charcha jab ham karte hain to kaun-si bat ekdam jaban par aati hai ? Yahi na ki “Kitni hari-bhari jagah hai vah !” Kashmeer, Shimla, Darjeeling aur any kisi aise jagah ki baten karen to yahi vaky munh se Nikalta hai aur kise Ganv ki bat karen…….

Description about eBook : When we talk about the beauty of a forest, what comes to mind? Not just “what a green place that is!” Talking about Kashmir, Shimla, Darjeeling and any other such place, then the same sentence comes out of the mouth and talk about any village……..

“कल्पना के उपरांत उद्यम अवश्य किया जाना चाहिए। सीढ़ियों को देखते रहना पर्याप्त नहीं है- हमें सीढ़ियों पर अवश्य चढ़ना चाहिए।” ‐ वैन्स हैवनेर
“The vision must be followed by the venture. It is not enough to stare up the steps – we must step up the stairs.”

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