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जैन-बौद्ध तत्वज्ञान भाग-2 / Jain-Bauddha Tatvagyan Part-2

जैन-बौद्ध तत्वज्ञान भाग-2 : सीतल प्रसाद द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक | Jain-Bauddha Tatvagyan Part-2 : by Sital Prasad Hindi PDF Book
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name जैन-बौद्ध तत्वज्ञान भाग-2 / Jain-Bauddha Tatvagyan Part-2
Author
Category,
Pages 287
Quality Good
Size 20.4 MB
Download Status Available

जैन-बौद्ध तत्वज्ञान भाग-2 का संछिप्त विवरण : सम्यक्‌ समाधि में पहुचने से स्मर ण का विकल्प भी समाधि के सागर में डूब जाता है। यही मार्ग है जिसके सर्व आस्रव या राग वेष मोह क्षय हो जाते हैं और यह निर्वाण रूप या मुक्त हो जाता है। वह निर्वाण कैसा है……

Jain-Bauddha Tatvagyan Part-2 PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Samyak samadhi mein pahuchane se smarn ka vikalp bhi samadhi ke sagar mein doob jata hai. Yahi marg hai jisake sarv asrav ya rag vesh moh kshay ho jate hain aur yah nirvan roop ya mukt ho jata hai. Vah nirvan kaisa hai.………..
Short Description of Jain-Bauddha Tatvagyan Part-2 PDF Book : By reaching the samayak samadhi, the choice of memory also gets immersed in the ocean of samadhi. This is the path of which all the cravings or rage gestures become decayed and it becomes nirvana form or free. How is that nirvana…………
“इस धरा पर जैसा कोई विषय नहीं जो अरुचिकर हो; यदि ऐसा कुछ है तो वह एक बेसरोकार व्यक्ति ही हो सकता है।” ‐ जी.के.चेस्टरटन
“There is no such thing on earth as an uninteresting subject; the only thing that can exist is an uninterested person.” ‐ G. K. Chesterton

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