परिव्राजक : स्वामी विवेकनन्द द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Parivrajak : by Swami Vivekanand Hindi PDF Book – Social (Samajik)

Book Nameपरिव्राजक / Parivrajak
Author
Category, ,
Language
Pages 148
Quality Good
Size 1.7 MB

पुस्तक का विवरण : पानी के किनारे तक वहां घास, गंगा की मंद मधुर हिलौर ने जहाँ तक जमीन को टेक रखा है, जहाँ तक घास ही घास जमीन से सटी हुई है। उसके नीचे हमारी गंगा का जल्द, फिर पैरों के नीचे से देखो क्रमश ऊपर-सिर के ऊपर तक , एक रेखा के अंदर इतने र॑गो की क्रीड़ा , एक ही रंग की इतनी किस्मे, और भी कहीं…………

Pustak Ka Vivaran : Pani ke kinare tak vahi ghas, ganga kee mand madhur hilore ne jahan tak jameen ko tak rakha hai, jahan tak ghas hee ghas jameen se satee huyi hai. Usake neeche hamarI ganga ka jald, phir pairon ke neeche se dekho kramash oopar-sir ke oopar tak , ek rekha ke andar itane rango kee kreeda , ek hee rang kee itanee kisme, aur bhee kaheen…………

Description about eBook : The same grass till the edge of the water, as far as the soft sweet hill of the Ganges has kept the ground tuck, as far as the grass, the grass is adjacent to the ground. Look at our Ganges below it, then look from below the feet to the top of the head respectively, so many colors within a line, so many varieties of the same color, and anywhere else………..

“हर सुबह जब मैं अपनी आंखे खोलता हूं तो अपने आप से कहता हूं कि आज मुझमें स्वयं को खुश या उदास रखने का सामर्थ्य है न कि घटनाओं में। मैं इस बात को चुन सकता हूं कि यह क्या होगी। कल तो जा चुका है, कल अभी आया नहीं है। मेरे पास केवल एक दिन है, आज तथा मैं दिन भर प्रसन्न रहूंगा।” ग्रोचो मार्क्स
“Each morning when I open my eyes I say to myself: I, not events, have the power to make me happy or unhappy today. I can choose which it shall be. Yesterday is dead, tomorrow hasn’t arrived yet. I have just one day, today, and I’m going to be happy in it.” Groucho Marx

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