प्रेमचंद की उपन्यास कला : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – साहित्य | Premchand Ki Upanyas Kala : Hindi PDF Book – Literature ( Sahitya )

प्रेमचंद की उपन्यास कला : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - साहित्य | Premchand Ki Upanyas Kala : Hindi PDF Book - Literature ( Sahitya )
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name प्रेमचंद की उपन्यास कला / Premchand Ki Upanyas Kala
Author
Category,
Language
Pages 162
Quality Good
Size 3 MB
Download Status Available

प्रेमचंद की उपन्यास कला पुस्तक का कुछ अंश : समीक्षा को भी मैं एक प्रकार का सत्यान्वेपी ही मानता हूँ और इस छोटी-सी पुस्तक के द्वारा, अपने जानते, अपनी उसी विनम्र चेष्टा का परिचय दे रहा हूँ जो एक सत्यान्वेपी समीक्षक के आत्मविश्वास तथा उसके उद्देश्य की सचाई से सम्बंद रखती है | यह दूसरी बात है कि जिसको मैं ‘सत्य’ के रूप में ग्रहण कर रहा हूँ……

Premchand Ki Upanyas Kala PDF Pustak in Hindi Ka Kuch Ansh : Samiksha ko bhi main ek prakar ka satyanvepi hi manta hun aur is choti-si pustak ke dwara, apne jante, apni usi vinamr cheshta ka parichay de raha hun jo ek satyanvepi samikshak ke aatmavishvas tatha uske uddeshy ki sachai se samband rakhti hai. Yah dusri baat hai ki jisko main saty ke rup mein grahan kar raha hun…………
Short Passage of Premchand Ki Upanyas Kala Hindi PDF Book : I also consider the review as a type of affirmative and through this small book, I am introducing my own knowledge, the same humble attempt, which relates to the truth of the truthful critic and the truth of its purpose. This is the second thing that I am taking as a ‘truth’……………
“जो व्यक्ति धन गंवाता है, बहुत कुछ खो बैठता है; जो व्यक्ति मित्र को खो बैठता है, वह उससे भी कहीं अधिक खोता है, लेकिन जो अपने विश्वास को खो बैठता है, वह व्यक्ति अपना सर्वस्व खो देता है।” ‐ एलेयानोर
“He who loses money, loses much; He who loses a friend, loses much more, He who loses faith, loses all.” ‐ Eleanor

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