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राजस्थानी लोकोत्सव / Rajasthani Lokotsav

राजस्थानी लोकोत्सव : गिंडाराम वर्मा द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - साहित्य | Rajasthani Lokotsav : by Gindaram Verma Hindi PDF Book - Literature ( Sahitya )
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name राजस्थानी लोकोत्सव / Rajasthani Lokotsav
Author
Category, , , ,
Language
Pages 88
Quality Good
Size 1.2 MB
Download Status Available

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

पुस्तक का विवरण : राजस्थानी लोकोत्सव पर आवश्यक सामग्री प्रस्तुत करते हुए परम हर्ष है | मेले और त्यौहार किसी भी देश और जाति के सांस्कृतिक जीवन के सच्चे प्रतीक होते है | उनके विशद अध्ययन के बिना सांस्कृतिक अध्ययन अधुरा होता है | भारतीय लोक-कला मंडल की खोज-विभाग की शोध-संबंधी प्रवत्तियों में मेले उत्सव और त्यौहारों का अध्ययन एक महत्वपूर्ण कार्य है करते हुए हमें अति आनंद हो रहा है | जब भगवान मानव जाती के उद्धार के लिए धराधाम में अवतरित होते हैं………..

Pustak Ka Vivaran : Rajasthani lokotsav par aavashyak samagri prastut karte hue param harsh hai. Mele aur tyauhar kisi bhi desh aur jati ke sanskrtik jeevan ke sachche pratik hote hai. Unke vishad adhyayan ke bina sanskrtik adhyayan adhura hota hai. Bharatiy lok-kala mandal ki khoj-vibhag kee shodh-sambandhi pravattiyon mein mele utsav aur tyauharon ka adhyayan ek mahatvapurn kary hai…………

Description about eBook : It is a great pleasure to present the necessary material on the Rajasthani Festival. Fairs and festivals are the true symbols of the cultural life of any country and caste. Without their vivid study, cultural studies are incomplete. The study of fair festivals and festivals is an important task in research related disciplines of the Indian Department of Folk Arts

“खुशी, दुख से कहीं अधिक पवित्र होती है; चूंकि खुशी रोटी है और दुख दवा है।” ‐ बीचर
“Joy is more divine than sorrow; for joy is bread, and sorrow is medicine.” ‐ Beecher

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