साहित्य-परिचय : नाथूराम प्रेमी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – साहित्य | Sahitya-Parichay : by Nathuram Premi Hindi PDF Book – Literature (Sahtiya)

साहित्य-परिचय : नाथूराम प्रेमी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - साहित्य | Sahitya-Parichay : by Nathuram Premi Hindi PDF Book - Literature (Sahtiya)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name साहित्य-परिचय / Sahitya-Parichay
Author
Category, , , , , ,
Language
Pages 172
Quality Good
Size 10.5 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : अभीतक यह निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता कि भाषा की उत्पत्ति कब और किस प्रकार हुई। कोई इसे देवी मानते है, तो कोई कहते है कि नहीं ; मनुष्यों ने विचारपूर्वक परस्पर व्यवहार के लिए ध्वनि-संकेतों की स्थापना की. किसी का मत है कि सृष्टि स्वभावत: उत्पन्न कलरव तथा पशुपक्षी आदि की
ध्वनियों को सुनकर मनुष्य ने कुछ प्रारम्भिक संज्ञाओं और क्रियाओं को स्वीकार किया……

Pustak Ka Vivaran : Abhitak yah nishchayapoorvak nahin kaha ja sakata ki bhasha kee utpatti kab aur kis prakar huyi. koi ise daivee manate hai, to koi kahate hai ki nahin ; manushyon ne vicharapoorvak paraspar vyavahar ke lie dhvani-sanketon kee sthapana kee. kisi ka mat hai ki srshti svabhavat: utpann kalarav tatha pashupakshee aadi kee dhvaniyon ko sunakar manushy ne kuchh prarambhik sangyaon aur kriyaon ko svikar kiya…………

Description about eBook : Till now it cannot be said with any certainty as to when and how the language originated. Some believe it to be divine, others say that it is not; Humans thoughtfully set up sound signals for interaction. Somebody is of the opinion that man accepted some initial nouns and verbs by listening to the sounds generated by the nature, tweet and animalism etc…………

“निकम्मे लोग सिर्फ खाने पीने के लिए जीते हैं, लेकिन सार्थक जीवन वाले जीवित रहने के लिए ही खाते और पीते हैं।” ‐ सुकरात
“Worthless people live only to eat and drink; people of worth eat and drink only to live.” ‐ Socrates

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