संयुत्तनिकायपालि : स्वामी द्वारिकादास शास्त्री द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – धार्मिक | Sanyuttanikayapali : by Swami Dwarikadas Shastri Hindi PDF Book – Religious (Dharmik)

संयुत्तनिकायपालि : स्वामी द्वारिकादास शास्त्री द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - धार्मिक | Sanyuttanikayapali : by Swami Dwarikadas Shastri Hindi PDF Book - Religious (Dharmik)
पुस्तक का विवरण / Book Details
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“केवल जानना पर्याप्त नहीं है, हमें अवश्य ही प्रयोग भी करना चाहिए। केवल इच्छा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमें कार्य करना भी चाहिए।” गोएथ
“Knowing is not enough; we must apply. Willing is not enough; we must do.” Goethe

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  • Pustak Ka Naam / Name of Book : संयुत्तनिकायपालि / Sanyuttanikayapali Hindi Book in PDF
  • Pustak Ke Lekhak / Author of Book : स्वामी द्वारिकादास शास्त्री / Swami Dwarikadas Shastri
  • Pustak Ki Bhasha / Language of Book : हिंदी / Hindi
  • Pustak Ka Akar / Size of Ebook : 116 MB
  • Pustak Mein Kul Prashth / Total pages in ebook : 745
  • Pustak Download Sthiti / Ebook Downloading Status : Best

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Pustak Ka Vivaran : Isi ko Jara Kahate hain. Tatha jo un un jeevon ka un un yoniyon se chyut ho jana, mukt ho jana, Dehapat ho jana, usase prthak‌ ho jana, An‍ntardhan (lop) ho jana, mrtyu, Maran, Samay Samapt ho jana, shareer ka gir jana, Skandhon ka chhinn bhinn ho janahai, isako kahate hain maran. Yon is jara evan is Maran ko Jaramaran kahate hain……………

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Description about eBook : This is called a bit. And those those creatures who get dislocated from those vagaries, get freed, become incarcerated, break away from it, end up in darkness (death), death, time expired, body collapsing, wrinkles It is known to be different, it is called death. Thus, this little and this death is called Jaramaran ……………

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“एक मूल नियम है कि समान विचारधारा के व्यक्ति एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं। नकारात्मक सोच सुनिश्चित रुप से नकारात्मक परिणामो को आकर्षित करती है। इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति आशा और विश्वास के साथ सोचने को आदत ही बना लेता है तो उसकी सकारात्मक सोच से सृजनात्मक शक्तियों सक्रिय हो जाती हैं- और सफलता उससे दूर जाने की बजाय उसी ओर चलने लगती है”

‐ नार्मन विंसेन्ट पीएले

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“There is a basic law that like attracts like. Negative thinking definitely attracts negative results. Conversely, if a person habitually thinks optimistically and hopefully, his positive thinking sets in motion creative forces — and success instead of eluding him flows toward him.”

‐ Norman Vincent Peale

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