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शिवा-बावनी / Shiva-Bavani

शिवा-बावनी : पं. हरिशंकर शर्मा द्वारा हिंदी पुस्तक - इतिहास | Shiva-Bavani : by Pt. Harishankar Sharma Hindi PDF Book - History (Itihas)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name शिवा-बावनी / Shiva-Bavani
Author
Category, ,
Language
Pages 113
Quality Good
Size 15.6 MB
Download Status Available

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

पुस्तक का विवरण : आगरा से शिवजी के इस प्रकार चतुराई से निकल आने पर औरंगजेब को बड़ा विषाद हुआ और उसने इसे हार मान शिवाजी स्वाधीनता राजा करार दे दिया। कई जागीरें भी दी। परन्तु सिंहगड और पुरन्धर ये दो किले अभी शिवाजी मिले सके। औरंगजेब शिवजी को स्वाधीनता राजा तो स्वीकार कर लिया था परन्तु उनके विरुद्ध उसके हृदय में ………

Pustak Ka Vivaran : Agra se shivajee ke is prakar chaturai se nikal aane par aurangajeb ko bada vishad hua aur usane ise haar man shivajee svadheenata raja karar de diya. kayi jageeren bhee dee. Parantu sinhagad aur purandhar ye do kile abhee shivajee mile sake. Aurangajeb shivaji ko svadheenata raja to sveekar kar liya tha parantu unake viruddh usake hrday mein…………

Description about eBook : Aurangzeb was saddened when Shiva’s cleverness came out of Agra and he called it Shivaji’s independence king. Many jagirs were also given. But Sinhgad and Purandhar, these two forts could still be found by Shivaji. Aurangzeb had accepted Shivaji as the king of independence but against him in his heart………..

“अपने ऊपर विश्वास रखें। जितना आप करते हैं उससे कहीं अधिक आप जानते हैं।” बेंजामिन स्पॉक
“Trust yourself. You know more than you think you do.” Benjamin Spock

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