जिन्दगी यूं गुजार दी : प्रेम सक्सेना ‘अजीज’ द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – कविता | Zindagi Yun Gujar Di : by Prem Saxena ‘Aziz’ Hindi PDF Book – Poem (Kavita)

जिन्दगी यूं गुजार दी : प्रेम सक्सेना 'अजीज' द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - कविता | Zindagi Yun Gujar Di : by Prem Saxena 'Aziz' Hindi PDF Book - Poem (Kavita)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name जिन्दगी यूं गुजार दी / Zindagi Yun Gujar Di
Author
Category, , , , , ,
Language
Pages 114
Quality Good
Size 751 KB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : अजीज की आवाज़ में रक तड़प और कलाम में एक सोज और सादगी है जो दिल में तीर की तरह उतर जाती है। एक ऐसी गहराई है जिसका कुछ अंदाजा उसमे डूब कर ही हो सकता है। मुझे उम्मीद है कि के शायक्रीन के लिए यह मजमुआ कारगर साबित होगा और ऐसी कमी जिनका जिक्र मैंने इब्तदा में किया था पूरी करेगा। ऐसा महसूस होता है……

Pustak Ka Vivaran : Ajeej kee Aavaz mein rak tadap aur kalam mein ek soj aur Sadagi hai jo dil mein teer kee tarah utar jati hai. Ek Aisee Gaharai hai jisaka kuchh Andaja usame doob kar hee ho sakata hai. Mujhe Ummeed hai ki ke shayaqeen ke liye yah majamua kargar Sabit hoga aur aisee kami jinaka jikr mainne ibtada mein kiya tha poori karega. Aisa Mahsoos hota hai…….

Description about eBook : Aziz’s voice has a rage and Kalam has a soak and simplicity that descends like an arrow in the heart. There is a depth that can only be estimated by drowning in it. I hope that this will prove to be effective for K Shaikin and will fill the gap that I mentioned in Ibtada. It feels like …….

“बच्चों को शिक्षित करना तो ज़रूरी है ही, उन्हें अपने आपको शिक्षित करने के लिए छोड़ देना भी उतना ही ज़रूरी है।” ‐ अर्नेस्ट डिमनेट
“Children have to be educated, but they have also to be left to educate themselves.” ‐ Ernest Dimnet

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